सुखम् गार्डन को बचाने पत्रिका ने सम्पादक और रिपोर्टरों की फौज सिटी पैलेस में की तैनात

जयपुर। किसी शायर ने खूब कहा है कि कौन कहता है, आसमां में सूराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो। ये पंक्तियां फिलहाल राजस्थान पत्रिका मालिक पर सटीक बैठती हैं। कौन कहता है मीडिया मालिक किसी ने नहीं डरते, उन्हें तबीयत से डराना तो सीखो। राजस्थान की महारानी मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से जब से पत्रिका ने पंगा लिया है, तब से पत्रिका मालिक की नींद हराम है। वसुंधरा ने जब से उनके सरकारी विज्ञापन बंद किए हैं, तब से तो पत्रिका मालिकों का जीना मुहाल हो गया है। उसके बाद अपने अखबार, सॉरी अपने मुखपत्र में वसुंधरा राज के खिलाफ अनर्गल बातें लिखकर इस लड़ाई को और हवा दे दी। पत्रिका मालिकों के मुखपत्र में अपने खिलाफ लेख प्रकाशित होने से मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस मीडिया मालिक को सबक सिखाने की सोची।

जेडीए के मुताबिक, सुखम् गार्डन भी सरकारी जमीन पर

जेडीए ने राजमहल पैलेस के गेट सील कर दिए, जेडीए का तर्क है कि गेट सरकारी जमीन पर बने हुए हैं। चूंकि, जेडीए जिस पूरी जमीन को सरकारी बता रहा है, उसमें राजमहल पैलेस के गेट ही नहीं पत्रिका मालिक गुलाब कोठारी का सुखम् गार्डन भी है। जेडीए ने पत्रिका मालिकों को सुखम् गार्डन पर उनके मालिकाना हक को लेकर कागजात पेश करने का नोटिस दे रखा है। सूत्रों का कहना है कि पत्रिका मालिकों के पास इसके कागजात नहीं हैं। इसलिए उन्हें लग गया कि अब सुखम् गार्डन भी हाथ से जाने वाला है। उन्होंने सोचा कि राजपरिवार का साथ देकर अपने सुखम् गार्डन को बचाया जा सकता है। इसलिए वे जयपुर राजपरिवार के साथ अप्रत्यक्ष रूप से खड़े हो गए। अपने मुखपत्र राजस्थान पत्रिका के जरिए राजमहल पैलेस के पक्ष में खूब समाचार प्रकाशित किए।

पत्रिका के ये सम्पादक रहे तैनात

इधर, राजमाता ने राजमहल पैलेस पर कार्रवाई के विरोध में राजपूत समाज की रैली निकालने का ऐलान किया। इस पर पत्रिका मालिक राजपरिवार के साथ खुलकर आ गए। रैली वाले दिन उन्होंने अपने सम्पादक गोविन्द चतुर्वेदी, राजीव तिवारी, अमित वाजपेयी, संदीप पुरोहित को सिटी पैलेस में राजपरिवार के समर्थन में खड़ा कर दिया। उनके साथ रिपोर्टर्स की फौज भी खड़ी कर दी। जिनमें सुनील सिंह सिसोदिया, भवनेश गुप्ता सहित कई थे। कुछ रिपोटर्स ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि हम तो नौकरी के मारे बे-मन से वहां गए थे। जब आपकी किसी से लड़ने की औकात नहीं है तो फिर रार मोल लेते क्यों हों। खैर पत्रिका मालिक सम्पादकों और रिपोटर्स की फौज तो खड़ी करवा सकते हैं, लेकिन इनके जरिए सुखम् गार्डन को बचा नहीं सकते हैं।

नहीं बचेगा सुखम् गार्डन

सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी सुखम् गार्डन मामले में पत्रिका मालिकों को किसी भी प्रकार की रियायत नहीं देगी। पत्रिका मालिकों ने अभी हाल ही में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से सुलह करने की भी कोशिश की थी, लेकिन मुख्यमंत्री ने उनको कोई भाव नहीं दिया।