पत्रिका प्रबंधन ने पिलाई लताड़, उच्चपदासीन व्यक्ति ने दिया इस्तीफा

जयपुर। सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया मामले में चल रहा केस अब पत्रिका के लिए गले की हड्डी बनता जा रहा है। पत्रिका प्रबंधन ने पहले तो अपने 'खास गुर्गों ' के कहने पर सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ने को मंजूरी दी थी। लेकिन, एक के बाद एक ऑर्डर देकर सुप्रीम कोर्ट ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। ऐसे में मालिकों का गुस्सा होना जायज है। सूत्रों के मुताबिक अभी कुछ दिनों पहले पत्रिका मालिक ने अपने प्रबंधन में उच्च पद पर आसीन एक व्यक्ति को इस मामले में जमकर डांट भी पिलाई। पत्रिका मालिकों ने उस उच्च पदासीन व्यक्ति से कहा कि तुम्हारे कहने पर हमने कर्मचारियों को मजीठिया बेज बोर्ड का लाभ नहीं दिया। उस समय हम 40-50 फीसदी वेतन बढ़ाकर कर्मचारियों को मना लेते। लेकिन, तुम्हारे कहने पर हमने ऐसा नहीं किया और सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ना मुनासिब समझा। उन्होंने कहा कि एक तो अब तक बहुत सारा पैसा वकीलों को दे दिया गया है। इसके बाद भी सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलती नहीं दिख रही है। उनका कहना था कि अब कर्मचारियों को पूरा वेतन और एरियर देना पड़ेगा। ऐसे में कम्पनी पर बहुत आर्थिक बोझ पड़ेगा। साथ ही वकीलों को जो पैसा दिया, वह अलग है। सूत्रों के मुताबिक उसके बाद उन उच्च पदासीन व्यक्ति ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि, वह इस्तीफा अभी स्वीकार हुआ या नहीं, इस बारे में अभी पता नहीं चल पाया है। सूत्रों का कहना है कि ये उच्च पदासीन व्यक्ति कुछ माह पहले भी अपना इस्तीफा दे चुके हैं, लेकिन पत्रिका के मालिकों ने तब उसे स्वीकार नहीं किया था। इसके बाद खबर है कि अब पत्रिका प्रबंधन केस में गए कर्मचारियों से जल्द ही कोई समझौता वार्ता आयोजित करने वाला है। इस बारे में उच्च स्तर पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। खबर है कि पत्रिका पहले उन कर्मचारियों से समझौता करेगा, जो केस में तो हैं, लेकिन पत्रिका ने उनका तबादला कहीं और नहीं किया है। इसके बाद पत्रिका उन सभी कर्मचारियों से समझौता करेगा, जो केस में गए हैं। सूत्रों का कहना है कि पत्रिका प्रबंधन को इस बात की भी चिंता है कि यदि उन्होंने कोर्ट गए कर्मचारियों को मजीठिया का लाभ दे दिया, तो बाकी बचे कर्मचारी विद्रोह ना कर दें। इसलिए पत्रिका प्रबंधन ऐसी कोई योजना पर विचार कर रहा है, जिससे कोर्ट गए कर्मचारियों को भी मना लें और जो अभी तक कोर्ट में नहीं गए, उनको भी नाराज ना करें। अभी हाल ही में हिन्दुस्तान टाइम्स प्रबंधन के खिलाफ आए कोर्ट के आदेश के बाद भी पत्रिका प्रबंधन में जबरदस्त बेचैनी है। साथ ही दैनिक भास्कर प्रबंधन की ओर से अभी हाल ही में जयपुर कार्यालय में कोर्ट नहीं गए कर्मचारियों से त्याग-पत्र पर हस्ताक्षर करवाने और कर्मचारियों के विद्रोह करने की घटना से भी पत्रिका प्रबंधन में बेचैनी का आलम है। इसलिए वह सोच-समझकर अपनी नई रणनीति पर काम कर रहा है। अब देखना यह है कि पत्रिका कब और ऐसी कौनसी योजना लाता है।