कर्मचारियों को हटा रहा पत्रिका प्रबंधन, 1200 को सेवा समाप्त का नोटिस

जयपुर। आखिर वही हुआ, जिसकी बात शुरू से की जा रही थी। राजस्थान पत्रिका प्रबंधन ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया है। मजीठिया का हक कम से कम कर्मचारियों देना पड़े, इसलिए उसने अब कर्मचारियों को हटाना शुरू कर दिया है। राजस्थान पत्रिका प्रबंधन ने फोर्ट फोलियो नामक कम्पनी में रखे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को एक पत्र दिया है। जिसमें लिखा है, मसलन-आपको 1 अक्टूबर 2012 के पत्र द्वारा दो वर्ष की अवधि के लिए नियुक्त किया गया था। जिसे प्रबंधन ने 31 दिसम्बर 2016 तक और बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। हालांकि, इसमें साफ तौर पर यह नहीं लिखा है कि 30 दिसम्बर के बाद उनकी नौकरी रहेगी या नहीं। सूत्रों का कहना है कि 25 दिसम्बर को ऐसे कर्मचारियों को बताया जाएगा कि उन्हें आगे कार्यालय में आना है या नहीं। सूत्रों का कहना है कि प्रारम्भिक तौर पर तो इस पत्र को पढ़कर यह ही समझ में आ रहा है कि फोर्ट फोलियो के कर्मचारी अब आगे कार्य नहीं करेंगे। खास बात यह है कि इन पत्रों पर तारीख दो साल पुरानी डाली गई है और कर्मचारियों से हस्ताक्षर अभी की तारीख डलवाकर करवा रहे हैं। यानी इन नोटिसों की इशू तारीख दो साल पुरानी होना दिखाया जा रहा है। जिससे ये कर्मचारी यह दावा नहीं कर सकें कि हमें एकदम से हटाया गया है। इसके लिए हमें पूर्व में कोई सूचना नहीं दी गई।

निशाने पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी

राजस्थान पत्रिका प्रबंधन ने राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की सभी शाखाओं में तैनात फोर्ट फोलियो कर्मचारियों को ऐसा नोटिस दिया गया है। सूत्रों का कहना है कि पत्रिका में करीब 1200 कर्मचारी फोर्ट फोलियो में हैं। इन कर्मचारियों में ज्यादातर चतुर्थ श्रेणी, मशीन विभाग, पेज मेकिंग और कम्प्यूटर विभाग में तैनात हैं। हालांकि, अभी नोटिस सिर्फ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को ही दिया गया है। सूत्रों का कहना है कि कर्मचारियों को हटाने की शुरूआत निचले स्तर से की गई है। उसके बाद अन्य विभागों में तैनात फोर्ट फोलियो कर्मचारियों को भी हटाया जाएगा। इसके पीछे प्रबंधन की नीति कॉस्ट कटिंग की है।

17000 से कम सैलेरी वाले कर्मचारियों को नोटिस

जयपुर में करीब 13 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को ऐसा नोटिस दिया गया है। राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के आंकड़ों पर बात की जाए तो करीब-करीब सभी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को हटाने का नोटिस दे दिया गया है। यह आंकड़ा करीब 250- 300 कर्मचारियों का है। सूत्रों के मुताबिक 17000 रूपए सैलेरी से नीचे वाले फोर्ट फोलियो को ऐसा नोटिस दिया गया है।

धीरे-धीरे आएगा सभी का नम्बर

सूत्रों का कहना है कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के बाद बाबुओं का नम्बर आएगा। कुल मिलाकर फोर्ट फोलियो कम्पनी को बन्द किया जा रहा है। इसलिए इसमें तैनात सभी कर्मचारियों को हटाया जा रहा है। इनके बाद मार्केटिंग, सर्कुलेशन, विज्ञापन और सम्पादकीय विभाग में तैनात फोर्ट फोलियो के कर्मचारियों का नम्बर आएगा। राजस्थान पत्रिका प्रबंधन ने 2010 के बाद सभी कर्मचारियों को फोर्ट फोलियो में ही ज्वॉइनिंग दी थी।

चमचों की कुर्सी पर नहीं आंच

ऐसे में इन सभी के सामने पेट भरने की समस्या हो गई है। ये सभी अपने भविष्य को लेकर चिन्तित हैं। इनका कहना है कि हमने तो मजीठिया का हक भी नहीं मांगा फिर भी हमें हटाया जा रहा है। जबकि हम इतनी कम सैलेरी में इतना काम करते हैं। वहीं कम्पनी ऐसे लोगों को नहीं हटा रही, जिनकी सैलेरी तो मोटी है, लेकिन कार्य कुछ नहीं है। ऐसे लोग कुर्सी तो तोड़ ही रहे हैं, साथ में इन पर मक्कारी की परत भी चढ़ गई है। इन लोगों में से एक को भी कम कर दिया जाए तो उसकी जगह पांच-छह कर्मचारी रखे जा सकते हैं। लेकिन, कम्पनी चमचे टाइप के लोगों को नहीं निकाल रही है। ये लोग अधिकारियों की चमचागिरी करके अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं और दूसरे लोगों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ रही है।

नोटंबदी का असर

सूत्रों का कहना है कि इसके पीछे नोटबंदी को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। नोटबंदी से बाजार में मंदी जैसे हालात हो गए हैं। विज्ञापन आ नहीं रहे हैं। राजस्थान पत्रिका के तो सरकारी विज्ञापन भी बंद हैं। ऐसे में नोटबंदी का सबसे बड़ा असर राजस्थान पत्रिका प्रबंधन पर पड़ा है। इसलिए वह कॉस्ट कटिंग के नाम पर छोटे कर्मचारियों को हटा रहा है। जबकि होना तो यह चाहिए था कि ठाले बैठकर मोटी सैलेरी ले रहे धूर्त किस्म के अधिकारियों को हटाकर कॉस्ट कटिंग की जाती। इससे कार्य भी प्रभावित नहीं होता।

अब तो जागो और ठोक दो केस

मजीठिया का केस जब से शुरू हुआ है, तभी से लोगों को समझा रहे थे कि जो केस करेगा, उसी को फायदा मिलेगा। बाकी लोगों को धीरे-धीरे हटा दिया जाएगा। लेकिन, किसी की बात समझ में नहीं आ रही थी। अब जब राजस्थान पत्रिका प्रबंधन ने असली रंग दिखाना शुरू कर दिया है, तो अब तो संभल जाइए। क्योंकि, अभी आप चुप रहे तो अगला नम्बर आपका ही है। अभी तो फोर्ट फोलियो कर्मचारियों का नम्बर है। थोड़े दिनों बाद आपका भी नम्बर आएगा। तब प्रबंधन आपको भी इसी तरह निकाल देगा। तब आपके पास पछतावे के अलावा और कोई विकल्प नहीं होगा। इसलिए डर को बाहर निकालो और मजीठिया का हक पाने का केस ठोक दो। श्रम आयुक्त के यहां शिकायत कर दो। संगठन में शक्ति होती है। सब संगठित हो गए तो प्रबंधन की क्या औकात की वह कर्मचारी का हक दबा जाए। इस स्थिति के बाद फोर्ट फोलियो के कर्मचारी भी मजीठिया का केस करने के बारे में विचार कर रहे हैं।

नहीं मिलेगा बचाने वाला

रहीम जी ने कहा है कि गरीब की हाय नहीं लेनी चाहिए, जिस प्रकार मरे हुए बैल की खाल की धोकनी बनाकर उससे लोहा भस्म हो जाता है, उसी प्रकार गरीब की हाय लेने वाला भी भस्म हो जाता है। राजस्थान पत्रिका प्रबंधन पहले से ही मजीठिया के नाम पर कर्मचारियों को हटाकर उनकी हाय ले ही रहा है अब चतुर्थ श्रेणी साथियों को हटाकर उनकी भी हाय ले रहा है। एक दिन यह हाय इन पर इतना असर करेगी कि इन्हें बचाने वाला कोई नहीं मिलेगा।