पत्रिका की कोई भी चाल नहीं चलने देंगे, हक लेकर रहेंगे

जयपुर। मजीठिया वेतन बोर्ड मामले में अपना हक पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में केस करने की सजा एक और मीडियाकर्मी को मिली है। राजस्थान पत्रिका में कई सालों से अपनी सेवाएं दे रहे त्रिलोक शर्मा का तबादला सिरोही कर दिया गया है। परिवार चलाने के लिए मजबूरीवश डिप्टी न्यूज एडिटर पद पर कार्यरत त्रिलोक शर्मा ने सिरोही स्थित ब्यूरो ऑफिस में ज्वॉइन कर लिया है। गौर करने वाली बात यह है कि डिप्टी न्यूज एडिटर रैंक के व्यक्ति का तबादला ब्यूरो ऑफिस में किया गया है। ब्यूरो ऑफिस में हैड भी अधिकांश सीनियर सब एडिटर रैंक के व्यक्ति ही होते हैं। ऐसे में डिप्टी न्यूज एडिटर को जूनियर व्यक्ति के नीचे करके राजस्थान पत्रिका मैनेजमेंट उनसे खुन्नस ही निकाल रहा है। जिससे व्यक्ति परेशान होकर स्वयं ही सुप्रीम कोर्ट से केस वापस ले ले। लेकिन, त्रिलोक शर्मा का कहना है कि मैनेजमेंट कोई भी चाल चल ले, वे सुप्रीम कोर्ट से केस वापस नहीं लेंगे। वे अपना हक लेकर ही रहेंगे।
मानसिक दबाब बनाने की कोशिश
कर्मचारियों की बड़ी भारी किल्लत से जूझ रहे राजस्थान पत्रिका मैनेजमेंट ने कई महीनों से तबादलों पर रोक लगा रखी थी। लेकिन, गत 22 जनवरी को त्रिलोक शर्मा के बड़े भाई का निधन हो गया था। अब उनके घर में मुखिया के तौर पर त्रिलोक शर्मा ही रह गए हैं। ऐसे में राजस्थान पत्रिका मैनेजमेंट तबादला कर त्रिलोक शर्मा पर मानसिक दबाव बना रहा है। उन्हें घर से दूर कर परेशान कर रहा है, जिससे वे राजस्थान पत्रिका के आगे घुटने टेक दें।
दिल्ली डेस्क की थी कमान
राजस्थान पत्रिका में कई प्रमुख पदों पर रह चुके त्रिलोक शर्मा के हाथों वर्तमान में दिल्ली डेस्क की कमान थी। उनके साप्ताहिक अवकाश के दिन बड़ी मुश्किल से किसी व्यक्ति को लगाकर दिल्ली एडिशन बनवाया जाता था। इस कारण कई बार तो उनका साप्ताहिक अवकाश भी कैंसिल हो जाता था। अब उनका तबादला होने से दिल्ली डेस्क के लिए कोई उपयुक्त व्यक्ति नहीं मिल रहा है। कभी किसी से तो कभी किसी को बिठाकर जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है।

जैसा त्रिलोक शर्मा ने मीडिया होल्स को बताया।