मशहूर पत्रकार डॉ देबाशीष बोस का निधन

पटना। इंडियन फेडरेशन ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट (IFWJ) के केंद्रीय सदस्यता प्रमाणन समिति के अध्यक्ष तथा जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ बिहार के महासचिव डा० देबाशीष बोस का बिहार के मधेपुरा नगर में निधन हो गया। 56 वर्ष के देबाशीष कैंसर से पीड़ित थे और मुंबई के कैंसर इंस्टिट्यूट में उनका इलाज चल रहा था। डा० बोस ने मुख्य निर्वाचन आधिकारी के नाते IFWJ के चुनाव गत सितम्बर में कराया, जिसमे कामरेड के.विक्रम राव पुनः राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए थे। उसी क्रम में डा०देबाशीष बोस ने इसी वर्ष मार्च में कर्नाटक में IFWJ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का चुनाव भी संपन्न कराया था। डा० देबाशीष बोस के बहुआयामी व्यक्तित्व में पत्रकारिता, अध्यापन और कानून के अलावा सामाजिक सेवा के कार्य भी जुड़े है। कानून की डिग्री के साथ वे भाषा-शास्त्री थे, जिसकी पीएचडी की डिग्री मिथिला विश्वविद्यालय से मिली थी | बंगाली, अंग्रेजी, हिंदी तथा मैथली भाषाओँ में वे निपुण थे।

श्रमजीवी पत्रकार आन्दोलन से तीन दशकों से जुड़े

श्रमजीवी पत्रकार आन्दोलन से वे तीन दशकों से जुड़े थे। पहले वे नेशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट के पदाधिकारी थे। वहां से मोह भंग होने पर IFWJ की बिहार इकाई के महासचिव निर्वाचित हुए। IFWJ के उदयपुर, लखनऊ, गुवाहाटी, भुबनेश्वर, बस्तर, बंगलौर आदि अधिवेशनों में शरीक हुए थे। चेन्नई 12 जून के सम्मलेन में ख़राब स्वास्थ के कारण नहीं आ पाए थे। हिंदी पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें राजेंद्र माथुर कुल कलाघर की उपाधि से सम्मानित किया गया था। विद्या वाचस्पति उपाधि से भागलपुर विश्वविद्यालय ने नवाज़ा। मधेपुरा के आरपीएम कॉलेज में प्रवक्ता भी थे।

हर अखबार और टीवी से जुड़े थे

बिहार का शायद ही कोई समाचार पत्र छूटा हो जिससे डा० बोस न जुड़े हो, जिसमे उल्लेखनीय है दैनिक हिंदुस्तान, जागरण, आज , प्रभात खबर, आर्यावर्त, राष्ट्रीय सहारा, UNI, इंडिया टुडे, सन्डे आब्जर्वर, सन्डे मेल, रविवार आदि | डा० बोस आकाशवाणी में कार्यरत थे, टीवी न्यूज़ के ZEE TV, इंडिया टीवी, आज तक, NDTV, TIMES NOW, स्टार न्यूज़ तथा दूरदर्शन से जुड़े थे | उन्होंने दक्षिण एशियाई देशो की व्यापक यात्रा की जिसमे श्रीलंका, भूटान, बांग्लादेश, नेपाल आदि शामिल है | डा० देबाशीष बोस के निधन पर लखनऊ, बेंगलुरू,कोल्कता,पटना,जयपुर आदि नगरों में श्रद्धांजलि सभायें आयोजित हुई |