सावधान! पत्रिका के मजीठिया साथियों के बीच में घर का भेदी

जयपुर। मजीठिया वेज बोर्ड का हक मांगने के लिए पत्रिका प्रबंधन से दो-दो हाथ करने वाले सभी साथियों...सावधान हो जाइए। यह खबर आपको विचलित कर सकती है, लेकिन इस खबर को आप तक पहुंचाना मीडिया होल्स की जिम्मेदारी है। विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि पत्रिका प्रबंधन ने अपना एक व्यक्ति मजीठिया साथियों के बीच में घुसा रखा है। इस व्यक्ति ने बकायदा केस भी कर रखा है और मजीठिया केस की अगुवाई करने वालों में भी इसकी गिनती होती है। यह मजीठिया साथियों के पूरे पैंतरों की जानकारी पत्रिका प्रबंधन को पहुंचा रहा है। सूत्रों का कहना है कि यह व्यक्ति मजीठिया केस की शुरूआत से उसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहा है।

इसलिए शक की वजह

इस व्यक्ति पर शक की सुई इसलिए है कि पत्रिका में मजीठिया केस करने वालों में से करीब-करीब सभी लोगों को टर्मिनेट या तबादला करके बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। मजीठिया केस की अगुवाई करने वालों में सिर्फ एक ये ही व्यक्ति ऐसे हैं, जिनको प्रबंधन ने अभी तक छेड़ा नहीं है। सूत्रों का कहना है कि ये महोदय सभी से आलोक नाथ जैसी मीठी-मीठी बातें करते हैं। लेकिन, एक फिल्म का डायलॉग है कि सभी मीठी-मीठी बातें करने वाले आलोकनाथ नहीं होते। पत्रिका ने जैसे सभी मुख्य-मुख्य मजीठिया कर्मचारियों को बाहर कर दिया है, ऐसे में इन महोदय को अभी तक क्यों नहीं छेड़ा। जबकि पत्रिका में इनका ओहदा बहुत बड़ा नहीं हैं और कार्य भी इनके पास जिम्मेदारी वाला नहीं है। यदि उस जगह से इन्हें हटा भी दिया जाए और अन्य कोई कर्मचारी वहां नहीं भी लगाया जाए तो भी कार्य में कोई बाधा नहीं पहुंचेगी। इसके बाद भी इन पर पत्रिका की मेहरबानी सवाल खड़े करती है।

मजीठिया साथी ने की निगरानी

एक मजीठिया साथी को इन पर काफी समय से शक था। उसने इन व्यक्ति पर नजर रखना शुरू किया। तब मजीठिया साथी को इन व्यक्ति की हरकत संदिग्ध लगी। यह मजीठिया साथी इन पर पूरी नजर बनाए हुए है और जल्द ही इस सम्बंध में पूरे प्रूफ जुटा लेगा कि ये व्यक्ति मजीठिया साथी के वेश में पत्रिका प्रबंधन का मोहरा है। यानी घर का भेदी लंका ढहाए जैसी कहावत इन महोदय पर फिट हो रही है। मीडिया होल्स जल्द ही प्रूफ सहित इस घर के भेदी की पहचान जाहिर करेगा।

संभलकर रहें मजीठिया साथी

मजीठिया साथी किसी से भी अपने मन की बात नहीं करें। खासकर मीठी-मीठी बातें करने वाले इन महोदय से बचकर रहें। सूत्रों का कहना है कि ये महोदय पत्रिका प्रबंधन को मजीठिया साथियों और उनके वकीलों की पूरी पोल और पैंतरे बता रहे हैं। इससे पत्रिका प्रबंधन को अपने पैंतरे चलने में आसानी हो रही है। इसी के चलते केस अभी तक खिंच रहा है, क्योंकि, इन महोदय के कारण पत्रिका प्रबंधन संभल जाता है। जल्द ही मजीठिया साथी इस बारे में एक बैठक कर निर्णय लेंगे कि इन व्यक्ति को मजीठिया केस की कानूनी गतिविधियों से दूर रखा जावें। वैसे पत्रिका के पुराने साथियों का यह भी कहना है कि इस मामले में इस व्यक्ति का पुराना रिकॉर्ड भी साफ-सुथरा नहीं है।