कैंसिल चेक ने उड़ाई राजस्थान पत्रिका कर्मचारियों की नींद

जयपुर। अखबार मालिकानों के खिलाफ मजीठिया मामले में कर्मचारी जब से सुप्रीम कोर्ट की शरण में गए हैं, तबसे ही कुछ ना कुछ हो रहा है। ताजा मामला राजस्थान पत्रिका का है। राजस्थान पत्रिका प्रबंधन ने झालाना स्थित कार्यालय में एक सर्कुलर लगाया है, इसे पढ़कर कर्मचारी अपने-अपने कयास लगा रहे हैं। इस सर्कुलर में लिखा हुआ है कि सभी कर्मचारी अपने-अपने खाते का ( जिसमें सैलेरी आती है) एक कैंसिल चेक दें और उस पर नाम, पता, खाता संख्या और पोस्ट लिख दें। पत्रिका प्रबंधन का कहना है कि यह बैंक की ओर से मांगी गई जानकारी है, ऐसा करने से कर्मचारियों की सैलेरी अब ऑनलाइन ट्रांसफर हो जाएगी। लेकिन, कर्मचारियों का कहना है कि कहीं इस कैंसिल चेक के बहाने पत्रिका प्रबंधन मजीठिया मामले में कुछ गड़बड़ तो नहीं कर रहा है। जो कर्मचारी सुप्रीम कोर्ट की शरण में नहीं गए हैं, वे सबसे ज्यादा आशंकित हैं। उन्हें डर है कि कहीं प्रबंधन उनके खाते में मजीठिया की एरियर राशि डाल भी दें और चुपचाप निकाल भी लें। जिससे वे सुप्रीम कोर्ट में उनकी बैलेंस शीट दिखा देंगे कि हमने इतने कर्मचारियों को मजीठिया की राशि दे दी। जबकि वास्तविकता में उनको राशि दी ही नहीं। कर्मचारी के पास भी इसका कोई प्रूफ नहीं होगा और वे भी सुप्रीम कोर्ट में कभी भी अपना दावा नहीं ठोक सकते। हालांकि, जो कर्मचारी सुप्रीम कोर्ट नहीं गए हैं, वे डरे हुए तो हैं, लेकिन इसका विरोध करने की उनमें हिम्मत नहीं है। वे प्रबंधन को कैंसिल चेक दे रहे हैं। वहीं कुछ अपने परिचितों और इसके विशेषज्ञों से सलाह ले रहे हैं कि आखिर कैंसिल चेक लेने का असल माजरा क्या है। भले ही कैंसिल चेक किसी भी कारण से लिए जा रहे हों, लेकिन इतना तो तय है कि पत्रिका प्रबंधन की नीयत किसी को भी मजीठिया का लाभ देने की नहीं है। कम से कम उनको तो कतई नहीं जो सुप्रीम कोर्ट नहीं गए हैं। उनको पता है कि जो अब सुप्रीम कोर्ट नहीं गया, वह बाद में क्या जाएगा। हालांकि, जो कर्मचारी सुप्रीम कोर्ट गए हैं, उनको तो प्रबंधन को मजीठिया का लाभ देना ही पड़ेगा।

जैसा पत्रिका के कर्मचारियों ने मीडिया होल्स को बताया