वाह! रे पत्रिका...बासी खबरें प्रकाशित कर पाठकों को बना रहा उल्लू

तमिलनाडु। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता का निधन सोमवार रात करीब 11ः30 बजे हो गया था। यह खबर आप सभी ने टीवी चैनलों में उसी वक्त देखी और सुनी होगी। अगले दिन सभी समाचार-पत्रों में भी पढ़ी होगी। इन सभी के बीच एक समाचार-पत्र ऐसा है, जो स्वयं को पाठकों का हितैषी बताता है और स्वयं को पल-पल की अपडेट जानकारी देने वाला। यह समाचार-पत्र चेन्नई और कोयम्बटूर दोनों जगह से प्रकाशित होता है। लेकिन, इस समाचार-पत्र में जयललिता के निधन का समाचार कहीं भी प्रकाशित नहीं हुआ है। इसमें समचार लगा हुआ है कि जयललिता का इलाज जारी। यानी पाठकों से सीधा-सीधा विश्वासघात। इस समाचार-पत्र का नाम है राजस्थान पत्रिका। अपने समाचार-पत्र में अपडेट खबर ना देकर यह पाठकों से छलावा कर रहा है।

...तो ये पाठक भी खो देगा पत्रिका

आंकड़े प्रकाशित कर स्वयं को नम्बर वन बताता है। क्या यही औकात है इस समाचार-पत्र की। अपनी इन्हीं कारस्तानियों के चलते यह अभी तक कोयम्बटूर और चेन्नई यानी साउथ में पाठकों के दिल में नहीं उतर पाया है। अभी तक इस समाचार-पत्र की कुल 4500 कॉपियां प्रकाशित हो रही हैं, जिनमें से 1500 बच जाती हैं। शेष 3000 में से अधिकांश कॉपियां सरकारी ऑफिसों में निशुल्क चली जाती है। कुछ कॉपियां वे पाठक खरीद रहे हैं जो राजस्थान से साउथ में जा बसे हैं। लेकिन, अगर राजस्थान पत्रिका में ऐसी ही बासी खबरें प्रकाशित होती रहीं तो ये पाठक भी बहुत जल्द पत्रिका खो देगा।

विश्वसनीयता पर सवाल

मजीठिया वेज बोर्ड के नाम पर कर्मचारियों के करोड़ों रूपयों पर तो इसके मालिक कुण्डली मारे बैठे हुए हैं ही। अब बासी खबरें पढ़ाकर पाठकों की जेब पर डाका भी डाल रहे हैं और खुद की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।

पहले स्वयं और अखबार पर लिखें टिप्पणी

इसके मालिक माननीय गुलाब कोठारी स्वयं को बहुत बड़ा टिप्पणीबाज मानते हैं और आए दिन अपने अखबार में सरकार के खिलाफ टिप्पणी लिखते रहते हैं। अब उनसे पूछा जाए कि पहले आप स्वयं के और अपने अखबार के कारनामों पर क्यों टिप्पणी नहीं लिखते। स्वयं पर टिप्पणी लिखो कि कैसे मजीठिया मांगने पर कर्मचारियों को प्रताड़ित किया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी अभी तक हजारों कर्मचारियों के हक पर कुण्डली मारे बैठा हूं। फिर समचार-पत्र में प्रकाशित होने वाली बासी खबरों पर टिप्पणी लिखें। यानी दूसरे पर टिप्पणी उसे करनी चाहिए, जिसका दामन साफ हो।