इस साथी की हिम्मत ने पत्रिका प्रबंधन को दिखाया आईना

जयपुर। अपने कर्मचारियों को पत्रिका परिवार के रूप में बताने वाले राजस्थान पत्रिका प्रबंधन की असली औकात धीरे-धीरे सामने आ रही है। जब से कर्मचारियों ने मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर माननीय सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, तभी से कर्मचारी राजस्थान पत्रिका प्रबंधन के लिए खटकने लग गए हैं। पत्रिका प्रबंधन पहले तो मजीठिया कर्मचारियों को नौकरी जाने का भय दिखाते हैं और फिर सैलेरी बढ़ाने का लालच, जिससे वे मजीठिया केस वापस ले लें। जब ये सारे हथकण्डे फेल हो जाते हैं, तब मजीठिया कर्मचारियों को प्रताड़ित करने की नीयत से दूर तबादला कर देते हैैं। पत्रिका प्रबंधन अब भी ऐसी ही कारस्तानियों को अंजाम दे रहा है। पत्रिका प्रबंधन ने मजीठिया केस करने की सजा एक और कर्मचारी को दी है। पत्रिका प्रबंधन ने इस मजीठिया साथी का तबादला बिलासपुर षाखा से बाड़मेर शाखा कर दिया है। इस साथी ने जब पत्रिका प्रबंधन की किसी भी चालबाजी के आगे घुटने नहीं टेके तो इन्हें परेशान करने की नीयत से इनका तबादला बाड़मेर कर दिया है।

हक के लिए करो केस

इन साथी का कहना है कि पत्रिका प्रबंधन कोई भी चाल आजमा लें, हम अपना हक लेकर रहेंगे। इन साथी का कहना है कि मैं सभी साथियों से कह रहा हूं कि तुम सभी मजीठिया का केस पत्रिका प्रबंधन पर करो, डरो मत। क्योंकि, अभी तुम डर के कारण चुप बैठे हो, हम परेशान हो रहे हैं तो तुम खुश हो रहे हो। लेकिन, एक दिन ऐसा आएगा कि हम खुश होंगे और तुम परेशान होंगे। तब तुम्हारा साथ देने के लिए कोई भी नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट में कर दी शिकायत

इन साथी ने बाड़मेर में ज्वॉइन कर लिया है। लेकिन इन्होंने तबादला करने की शिकायत श्रम आयुक्त और सुप्रीम कोर्ट को कर दी है। अब देखने वाली बात यह है कि पत्रिका प्रबंधन की मक्कारियों के लिए सुप्रीम कोर्ट का चाबुक कब पड़ता है।

साथी की हिम्मत काबिले तारीफ

खास बात यह है कि इन साथी को ज्वॉइनिंग पत्रिका प्रबंधन ने फोर्ट फोलियोज नामक अपनी ही दूसरी कम्पनी में दे रखी है और पत्रिका में ठेका कर्मचारी के रूप में कार्य करना बता रखा है। इसके बाद भी इन साथी ने मजीठिया केस करने की हिम्मत दिखाई है। ये साथी वाकई तारीफ के काबिल है। अभी तक ज्यादातर केस पत्रिका के स्थायी कर्मचारियों ने ही किए हैं। इन साथी से बाकी उन साथियों को भी सबक लेना चाहिए, जो स्वयं को ठेकाकर्मी बताते हुए केस करने से डर रहे हैं। उनके लिए मजीठिया मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट साफ कर चुका है कि ठेकाकर्मी भी मजीठिया वेज बोर्ड का हकदार है।