पत्रिका प्रबंधन ने केस नहीं गए कर्मचारियों से प्रेम पूर्वक इस्तीफा लेने की बनाई प्लानिंग

जयपुर। यह खबर मजीठिया लड़ रहे सभी साथियों के लिए भले ही उतनी महत्वपूर्ण ना हों। लेकिन, जिन कर्मचारियों ने अभी तक केस नहीं किया है और ये मानकर चल रहे हैं कि जब केस करने वालों को मजीठिया का लाभ मिलेगा तो हमको भी मिलेगा। हम उन्हें यह बताना चाहते हैं कि केस वालों को मजीठिया का हक मिलेगा, उससे पहले ही आपको प्रबंधन किसी दूसरी कम्पनी में कर देगा और सुप्रीम कोर्ट में आपका प्रबंधन के साथ हुए समझौते को दिखा देगा। इतना ही नहीं कई कर्मचारियों को हटाकर वो आप पर मानसिक रूप से इतना प्रेशर बना देगा कि आपको यह लगने लगेगा कि मेरी नौकरी कहीं चली ना जाए। आपमें प्रबंधन नौकरी जाने का इतना भय भर देगा कि आप मजीठिया की मांग कभी भी नहीं करेंगे। कुछ ऐसा ही कर दिया है पत्रिका प्रबंधन ने। पत्रिका प्रबंधन ने अभी कुछ दिनों पहले एक मीटिंग की थी। उस मीटिंग में सभी कर्मचारियों पर काम का बोझ इतना लाद दिया है कि कोई भी कर्मचारी उस कार्य को नहीं कर सकता है। इतना कार्य आप पर लादने के बाद आप यदि कार्य नहीं कर पाएंगे तो आपको नोटिस देकर नौकरी जाने का भय दिखाया जाएगा। आखिर में आप मजबूर होकर अधिकारी से विनती करोगे तो आपको कहा जाएगा कि आप पत्रिका से इस्तीफा देकर दूसरी कम्पनी में ज्वॉइनिंग ले लें। उस स्थिति में आप भी इस्तीफा देना ही उचित समझेंगे। यानी यह सारी मशक्कत प्रेम-पूर्वक आपसे इस्तीफा लेने की है। अब आप सोचिए कि मजीठिया मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी आप इनसे किस हक से मजीठिया की मांग करेंगे। इसके लिए बाकायदा एक मसौदा बनाया गया है, जिसे न्यूजरूम री-स्टक्चरिंग का नाम दिया है। इसमें शुरूआत में साफ-साफ लिखा है कि पहले चरण में 25 फीसदी रिपोर्टरों को हटाना है। यानी पहले चरण में ही 25 फीसदी कर्मचारी कम करने हैं तो अगले चरणों में तो सभी कर्मचारियों को हटा दिया जाएगा। अब सवाल यह उठता है कि काम कौन करेगा तो इसका हल भी मसौदे में लिखा है। इसमें लिखा है कि एयरपोर्ट के टैक्सी डाइवर को अपना इन्फॉर्मर बना लो, उसे उसकी एवज में तीन-चार हजार रूपए दिए जाएंगे। वह इन्फॉर्मर पत्रिका प्रबंधन को एयरपोर्ट की हर गतिविधि की जानकारी दे देगा। हर बीट में ऐसे ही इनफॉर्मर बनाए जाएंगे। साथ ही हर बीट में कुछ एक्सपर्ट पैनल बनाने की बात कही गई है। जो इन्हें स्टोरी आइडिया भी देंगे और खबर बनाकर भी देंगे। यानी रिपोर्टरों का कार्य खत्म।

सभी कर्मचारियों पर लाद दिया है बोझ

पत्रिका के झालाना कार्यालय में इस बाबत् हुई मीटिंग के अनुसार अब रिपोर्टर जो कार्य कर रहा है, वह तो करता ही रहेगा। इसके अलावा रोजाना पांच ब्रेकिंग न्यूज, पांच सिंगल कॉलम खबर, पांच खबर 200 से 250 शब्दों तक की, तीन खबर 500 शब्दों तक की और दो खबर 700 से 1000 शब्दों तक की। साथ ही दो ऐसी खबरें जिनमें वीडियो भी हो। अब डेस्ककर्मी की हालत सुनिए। वह जो कार्य कर रहा है वह तो करता ही रहेगा। इसके अलावा रोजाना दो एक्सक्लूसिव खबर, साथ ही रिपोर्टर से कॉर्डिनेशन और उसके कार्य में हैल्प। डेस्ककर्मी एक दिन रिपोर्टर की तरह फील्ड का कार्य करेगा और रिपोर्टर उस दिन डेस्क का कार्य करेगा। अपने रोज के कार्य के अलावा फोटोग्राफर अब पांच एक्सक्लूसिव फोटो, दो वीडियो खबरें, दो फोटो गैलेरी के लिए फोटो, एक फोटो फीचर और दो खबरें भी देनी है। इसके लिए बाकायदा फोटोग्राफर को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसके साथ ही पेजमेकर को रोजाना के कार्य के साथ ही वेबसाइट पर कार्य करना सिखाया जाएगा और वे वेबसाइट पर खबरें डालने का कार्य करेंगे। स्थानीय सम्पादक भी दो खबर रोज एक्सक्लूसिव देगा और रोज समाज के पांच बड़े लोगों से मिलेगा। उनसे बातचीत में जो खबरें निकलेगी, वे भी बनानी हैं। यानी अभी तक सम्पादक बनकर मजे कर रहे चमचों को भी कार्य करना पड़ेगा। मुझे उन सम्पादकों पर तरस आ रहा है, जिन्होंने अपनी अभी तक के कॅरियर में ना रिपोर्टिंग की है और ना ही डेस्क का कार्य, लेकिन कैंटीन में चाय बोलकर अधिकारी के केबिन में बैठ-बैठकर सम्पादक बन गए हैं, अब वे कैसे खबरें लिखेंगे। खैर आगे की बात करते हैं। पत्रिका में कार्य कर रहा प्रत्येक कर्मचारी अब इन्फॉर्मर का कार्य करेगा, इसके लिए उसे भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। तो साथियों अब आप खुद ही सोचिए कि एक व्यक्ति इतना कार्य कैसे कर सकता है और यदि वह करेगा भी तो 12 से 14 घंटे में इतने कार्य हो पाएंगे।

पाठकों से लिखवा रहें खबरें

पत्रिका प्रबंधन ने समाचार-पत्र का अभी थोड़े दिनों पहले ले-आउट बदला था। इस ले-आउट के साथ ही यदि आपने समाचार-पत्र का ढंग से अवलोकन किया हो तो उसमें आपको दिखा होगा कि ज्यादातर खबरें पाठकों से लिखवाईं हुई हैं। पत्रिका प्लस में तो रोज ही पाठकों और एक्सपर्ट से ही खबर लिखवाई जा रही है। मुख्य समाचार-पत्र में भी ऐसा हो रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर कर्मचारी पर ही पड़ेगा। जब उसके बिना पत्रिका का कार्य चल रहा है तो वह उसे क्यों रखेगा। साथ ही नोएडा में 250 लोगों की भर्ती की गई है और लोकल पेजों को छोड़कर पूरा समाचार-पत्र वहीं से बनकर आ रहा है। झालाना में ज्यादातर कर्मचारियों के पास कोई कार्य नहीं है। ऐसे में जो कर्मचारी केस में नहीं गए हैं, पत्रिका प्रबंधन उन्हें सीधे संदेश देना चाह रहा है कि हमें आपकी जरूरत नहीं है। ऐसे में कर्मचारी केस ना करके नौकरी करने की सोचेगा और पत्रिका प्रबंधन आराम से उसका इस्तीफा ले लेगा। यानी यदि आपने केस नहीं किया तो आपको पछताना पड़ेगा ही।