पत्रिका में कम्प्यूटर से नेट की दूरी, साथियों के लिए बना मजबूरी

जयपुर। राजस्थान पत्रिका प्रबंधन ने हाइपर सिटी के नाम पर जयपुर शहर के कोने-कोने में कार्यालय खोल दिए और उनमें सम्पादकीय विभाग, वितरण विभाग और मार्केटिंग विभाग के साथी नियुक्त भी कर दिए। पत्रिका को नजदीक से जानने वाले यह तो बखूबी जानते हैं कि वे तुरन्त निर्णय तो कर देते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता कि इसका असर क्या होगा। अब हाइपर सिटी के ऑफिसों में सम्पादकीय विभाग के साथियों के पास कम्प्यूटर तो पहुंचा दिए, लेकिन नेट कनेक्शन अभी तक नहीं दिया। ऐसे में सम्पादकीय विभाग के साथी कैसे कार्य करें, उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा है।

अधिकारियों ने झाड़ा पल्ला तो साथियों ने लगाया जुगाड़

सूत्रों का कहना है कि नए खोले गए हाइपर सिटी के ऑफिसों में नेट कनेक्शन ही नहीं दिया गया है। ऐसे में सम्पादकीय विभाग के साथी कार्य ही नहीं कर पा रहे हैं। जब उन्होंने अपनी यह प्रॉब्लम सम्बंधित अधिकारियों को बताई तो उन्होंने कहा कि झालाना में आकर खबर बना लो। यह जवाब सुनकर उनका धर्मसंकट और बढ़ गया, क्योंकि, झालाना में नेट कनेक्शन तो है, लेकिन कम्प्यूटर नहीं है। ऐसे में वे खबर बिना कम्प्यूटर के कैसे बनाएंगे।
जब अधिकारियों को उन्होंने इस बारे में बताया तो उन्होंने कहा कि थोड़े दिन तो जैसे-तैसे काम चलाओ, फिर देखते हैं। अब बेचारे सम्पादकीय साथियों की हालत मरता क्या नहीं करता जैसी हो गई है। वे अब डोंगल लगाकर जैसे-तैसे कार्य कर रहे हैं। यानी अब आप भी जान सकते हैं कि पत्रिका में निर्णय बिना सोझे-समझे हो जाते हैं। कार्ययोजना पहले लागू कर दी जाती है और सुविधाएं पहुंचती नहीं हैं। इसके बाद भी कार्य की गुणवत्ता की उम्मीद अपने प्रतिस्पर्धी अखबारों से बेहतर की जाती है।