सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया मामले पर 23 अगस्त को सुनवाई, 20 जे पर निर्णायक फैसला संभव

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया मामले पर सुनवाई 23 अगस्त को होगी। पिछले आदेश के मुताबिक कोर्ट उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, नगालैण्ड और मणिपुर की स्टेट्स रिपोर्ट की समीक्षा करेगा। इस दौरान इन पांच राज्यों के सम्बंधित श्रम आयुक्त कोर्ट परिसर में रहेंगे। माननीय जज साहब इनसे ही स्टेट्स रिपोर्ट के बारे में सवाल करेंगे। हालांकि, इन राज्यों से मजीठिया मामले की शिकायतें बहुत कम हैं। लेकिन, स्टेट्स रिपोर्ट तो श्रमायुक्तों को देनी ही पड़ेगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस दिन वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट के मुताबिक 20-जे पर भी बहस होगी। कर्मचारियों और अखबार मालिकों के वकील इस मुद्दे पर अपने-अपने तर्क प्रस्तुत करेंगे। ज्यादातर अखबार मालिकानों ने इसी को ढाल बनाया है और कर्मचारियों को मजीठिया वेतन बोर्ड का लाभ नहीं दिया है। वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट में 20-जे की धारा का क्या मतलब है, उसके अनुसार ही कोर्ट इस बारे में अपना कोई निर्णय सुनाएगा।

एक्ट के मुताबिक कर्मचारियों की जीत पक्की

वैसे तो वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट के मुताबिक वेज बोर्ड से कम सैलेरी में किसी भी कर्मचारी से किया गया समझौता अमान्य होता है। ऐसे में इस मुद्दे पर कर्मचारियों की जीत पक्की है। इसलिए यदि 20 जे पर कोर्ट ने अपना रूख कर्मचारियों के पक्ष में दे दिया तो फिर अखबार मालिकान इस केस को ज्यादा लम्बा नहीं खिंचवा सकते हैं। इसलिए पांच राज्यों की सुनवाई से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि 23 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट 20-जे पर अपना रूख साफ कर दे। यदि ऐसा हो गया तो फिर बाकी राज्यों के कर्मचारियों को घबराने की जरूरत नहीं है कि हमारा नम्बर कब आएगा। इन पांच राज्यों के साथ ही सभी पर यह आदेश लागू हो जाएगा।