मजीठिया मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, 20 जे पर फाइनल फैसला संभव, दिल्ली में बैठक कर रहे मीडिया मालिक

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में फिर मजीठिया की सुनवाई की घड़ी आ गई है। मीडिया मालिकों के दिल की धड़कने भी बढ़ने लग गई हैं। जिन मीडिया मालिकों के राज्यों की सुनवाई है, वे दिल्ली में वकीलों से लगातार मीटिंग कर रहे हैं। वकीलों से राय ले रहे हैं कि अब कैसे बचा जा सकता है। हालांकि, उनके वकीलों ने उन्हें कह दिया है कि अब मजीठिया का मामला ज्यादा दिन तक नहीं खींचा जा सकता है। खैर अब हम बात करते हैं सुनवाई की। मजीठिया साथियों के साथ ही सब लोग यह जानना चाह रहे हैं कि आखिर 4 अक्टूबर को सुनवाई के दिन पिछली सुनवाई वाले राज्यों के प्रति सुप्रीम कोर्ट का क्या रूख रहेगा। साथ ही जिन राज्यों की सुनवाई है, उनके श्रमायुक्तों और मीडिया मालिकों को माननीय सुप्रीम कोर्ट कैसी लताड़ पिलाते हैं। 20 जे पर माननीय जज साहब क्या आदेश देते हैं। हालांकि, यह सब कुछ माननीय जज साहब पर ही निर्भर करता है। फिर भी मजीठिया साथियों के लिए हमने विशेषज्ञों की राय लेकर यह अनुमान लगाने की कोशिश की है कि उस दिन सुप्रीम कोर्ट में यह हो सकता है।

श्रमायुक्त और मीडिया मालिक बन सकते हैं कोपभाजन का शिकार

विधि विशेषज्ञों का कहना है कि पिछली सुनवाई वाले राज्यों उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, नगालैण्ड और मणिपुर की स्टेट्स रिपोर्ट की समीक्षा करेगा। इन राज्यों ने मजीठिया को पूरा लागू नहीं किया है। सूत्रों के हवाले से जो अभी तक खबरें आईं हैं, उनके मुताबिक इन राज्यों में मीडिया मालिको ने आधा-अधूरा और अपने मनमुताबिक मजीठिया का लाभ दिया है। ऐसे में पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने जैसे इनके श्रमायुक्तों को डांट पिलाई थी, ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि अब उन श्रमायुक्तों की खैर नहीं, जो गलत तथ्य पेश करेंगे। हालांकि, अगर श्रमायुक्तों ने सारा ठीकरा मीडिया मालिकों पर फोड़ दिया तो मीडिया मालिकों को सुप्रीम कोर्ट का कोपभाजन का शिकार होना पड़ सकता है।

वकीलों से ले रहे सलाह

अब 4 अक्टूबर को मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, महाराष्ट, और झारखंड की सुनवाई है। इनके श्रमायुक्त मजीठिया देने की स्टेट्स रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जमा कराएंगे। चूंकि, इन राज्यों में मीडिया मालिकों ने मजीठिया का लाभ अभी तक नहीं दिया है। ऐसे में श्रमायुक्त रिपोर्ट में क्या देते हैं, यह देखने वाली बात है। अगर उन्होंने भी गोलमोल रिपोर्ट पेश की तो फिर उनकी भी खैर नहीं है। इसी बात से डरे मीडिया मालिक अपने वकीलों से सलाह-मशविरा कर रहे हैं।

20 जे पर लिखित आदेश संभव

साथ ही पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से 20 जे पर कहा था कि जो वेतन ज्यादा होगा, वही मान्य होगा। सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया मालिकों को इस बारे में अपना पक्ष रखने को कहा है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि इस बार सुप्रीम कोर्ट 20 जे पर लिखित आदेश पारित कर दे। इसके बाद मीडिया मालिकों के होश ठिकाने आ जाएंगे। क्योंकि, पूरे केस में उन्होंने अभी तक 20 जे को ही ढाल बना रखा है।