मजीठिया साथी का जवाब सुन राकेश भण्डारी की बोलती बंद

जयपुर। मजीठिया मामले को लेकर देशभर में मीडिया मालिकों और कर्मचारियों में ठनी हुई है। मीडिया मालिक येन-केन प्रकारेण मजीठिया साथियों को तोड़ने की कोशिशें भी कर चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट में अपने बड़े-बड़े वकीलों की फौज खड़ी कर रखी है, जो उन्हें बचाने की भरसक कोशिशें कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया मामला लम्बा खिंचता देख अब मीडिया मालिकों के गुर्गे फिर से सक्रिय हो गए हैं। वे उन साथियों को गुमराह कर रहे हैं, जिन्होंने अभी तक केस नहीं किया है। ये गुर्गे ऐसे साथियों को कह रहे हैं कि अब केस करने से कोई फायदा नहीं है, अब सुप्रीम कोर्ट से मामला श्रम कोर्ट में आ गया है। इन गुर्गों का एजेण्डा यह है कि नए साथी केस में ना जाएं और कम्पनी को इन साथियों को एरियर के रूप में ना तो मोटी रकम देनी पड़े और ना ही मोटी सैलेरी। ऐसा करके ये कम्पनी की नजर में भी खासमखास बने रहना चाहते हैं।

कर्मचारियों के जाने हाल-चाल

सूत्रों के मुताबिक कुछ ऐसा ही हो रहा है राजस्थान पत्रिका में। मजीठिया मामले में लम्बी तारीख पड़ने के बाद यहां पर अधिकारियों का एक गुट सक्रिय हो गया है। अभी कुछ दिनों पहले राजस्थान पत्रिका के मालिकों के रिश्तेदार और कम्पनी में मशीन विभाग के हैड की भूमिका निभा रहे राकेश भण्डारी ने मशीन विभाग के कर्मचारियों की मीटिंग ली थी। उस बैठक में उन्होंने कर्मचारियों से उनके हाल-चाल पूछे और उनकी समस्याओं को जाना। सूत्रों का कहना है कि कर्मचारियों ने आपस में कहा कि ऐसे तो कभी समस्याओं को जानने नहीं आए। कभी हम समस्या लेकर जाते थे तो मिलने का समय ही नहीं होता था और अब खुद हमारी समस्या पूछने आए हैं।

भाईसाहब, कभी हम भी जीत ही जाएंगे

इसके बाद उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि अब मजीठिया मामले में कुछ भी नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने मामला श्रम कोर्ट में डाल दिया है। अब श्रम कोर्ट में कुछ भी नहीं होगा। कम्पनी एक तरह से केस जीत चुकी है। इसलिए आप लोग केस के झंझट में मत पड़ो। अच्छे से काम करो और कम्पनी के वफादार बने रहो। इस दौरान मजीठिया मामले में सुप्रीम कोर्ट की शरण में गए एक साथी खड़े हुए और उन्होंने हाथ जोड़कर राकेश भण्डारी से कहा कि भाईसाहब अगर कम्पनी जीत गई है तो कोई बात नहीं है। किसी दिन हम भी जीत ही जाएंगे। यह जवाब सुनकर राकेश भण्डारी की बोलती बंद हो गई और वे सपकपाकर तुरन्त उठकर चले गए।