मीडिया मालिकों के इन्द्रजाल से रहें दूर, एक मालिक तो कम्पनी भी एक

जयपुर। देशभर के मजीठिया साथियों। सुप्रीम कोर्ट में हर तारीख पर इस मामले की सुनवाई के बाद मीडिया मालिकों की सांस ऊपर-नीचे होती है। सुप्रीम कोर्ट ने मजीठिया का एरियर और वेतन तय करने के लिए श्रम आयुक्तों को निर्देशित भी कर दिया है। ऐसे में जिन साथियों ने शिकायत की है, उन्हीं को इसका लाभ मिलेगा। अब मालिक और भी डर गए हैं, क्योंकि, अब तक जिन साथियों ने शिकायत नहीं की है, वे भी शिकायत करने का मूड बना रहे हैं। इसलिए जितने ज्यादा साथी शिकायत करेंगे, मीडिया मालिकों की जेब पर उतना ही ज्यादा फटका लगेगा। इसलिए वे उन साथियों में भ्रम फैला रहे हैं, जिन्होंने अभी तक मजीठिया की शिकायत नहीं की है। मीडिया मालिकों के गुर्गे सुनियोजित तरीके से इन साथियों को टारगेट कर उन्हें बरगला रहे हैं। उनसे कहा जा रहा है कि आप जिस यूनिट में कार्य करते हो, वहां की टर्नओवर इतना कम है कि यह यूनिट ८ वीं कैटेगिरी में आ रही है। इसलिए उतना ही आपका वेतन बनेगा, जितना आपको मिल रहा है। साथ ही एरियर भी लाख-पचास हजार रुपए बनेगा। इसलिए इतने कम पैसों के लिए क्यों अपनी नौकरी पर संकट डाल रहे हो। वेतन तो आपको पूरा मिल ही रहा है।

पत्रिका, भास्कर प्रबंधन भ्रम फैलाने में अव्वल

इस तरह का भ्रम राजस्थान पत्रिका और दैनिक भास्कर प्रबंधन के गुर्गे फैला रहे हैं। ये कह रहे हैं कि आप जिस यूनिट में काम कर रहे हो, उसी के टर्नओवर के आधार पर आपके मजीठिया वेतन और एरियर की गणना की जाएगी। यह बिलकुल गलत है, क्योंकि, सबसे पहले इस तरह की कारस्तानी अमर उजाला प्रबंधन ने की थी।

सुप्रीम कोर्ट कर चुका है मना

अमर उजाला प्रबंधन ने वर्ष २०१४ में ही अपनी सभी यूनिटों को अलग-अलग कम्पनी बनाकर कागजों में दिखा दिया था। तब सुप्रीम कोर्ट ने अमर उजाला प्रबंधन की इस दलील को नहीं माना और सख्त लहजे में कहा कि एक मालिक एक कम्पनी। आप अलग-अलग यूनिट को अलग-अलग कम्पनी नहीं बना सकते हो। सारी यूनिटों के मालिक एक हैं तो कम्पनी भी एक ही मानी जाएगी। इसका सीधा सा अर्थ है कि चाहे राजस्थान पत्रिका हो, भास्कर हो या फिर कोई अन्य अखबार। उनके समूह का पूरा टर्नओवर ही मजीठिया वेतन और एरियर की गणना में माना जाएगा। दैनिक भास्कर और दैनिक जागरण तो ए ग्रेड में है ही, क्योंकि, वह शेयर बाजार में लिस्टेड है। इसलिए वह कोई बहाना नहीं बना सकता है। रही बात राजस्थान पत्रिका की तो वह पहले ग्रेड सी में था, लेकिन अब वह भी ए ग्रेड में है। एक मोटे अनुमान के तौर पर एक कर्मचारी का वेतन करीब ढाई गुना तक बढ़ जाएगा। साथ ही एरियर भी कम से कम १५ लाख रुपए बनेगा। कर्मचारी जितना ज्यादा पुराना उतना ज्यादा एरियर। इसलिए कई साथियों का एरियर तो ३०-३५ लाख रुपए भी बन रहा है।

फिर क्यों कर रहे हैं तबादला
मीडिया होल्स के पास राजस्थान पत्रिका और दैनिक भास्कर के विभिन्न संस्करणों में कार्य करने वाले कई साथियों के फोन आए। उन्होंने कहा कि मीडिया मालिक कह रहे हैं कि आप जिस यूनिट में कार्य कर रहे हैं, उसका टर्नओवर बहुत कम है। इसलिए आपका वेतन और एरियर बहुत ज्यादा नहीं बन रहा है। इसलिए आप शिकायत कर अपनी नौकरी पर संकट क्यों डाल रहे हो। ऐसे सभी साथियों से मीडिया होल्स का
कहना है कि आप मीडिया मालिकों की किसी भी बात को नहीं सुनें। क्योंकि, सारे मीडिया मालिक अपने पूरे गु्रप के टर्नओवर और सर्कुेलेशन के आधार पर ही सरकारी विज्ञापन ऊंचे दामों पर लेते हैं। प्राइवेट विज्ञापन प्रदाता को भी अपने पूरे गु्रप का सर्कुेलेशन बताया जाता है, उसी आधार पर विज्ञापन की रेट तय होती है। ना कि अलग-अलग यूनिटों के सर्कुेलेशन और टर्नओवर के आधार पर। साथ ही जब मीडिया मालिक सब यूनिटों को अलग-अलग कम्पनी बता रहे हैं तो फिर मजीठिया साथियों का तबादला एक यूनिट से दूसरी यूनिट में कैसे कर रहे हैं। ऐसा करना कानूनन गलत है। यदि आपकी सभी यूनिटें अलग-अलग कम्पनी है तो अजमेर यूनिट के साथी को जयपुर या फिर बिलासपुर वाले साथी को सीकर नहीं भेज सकते हैं। इसलिए साथियों डरो मत, मीडिया मालिक आपके सामने भ्रम का इन्द्रजाल फैलाना चाह रहे हैं। उस इन्द्रजाल में आप मत फंसो, क्योंकि, इनके सारे झूठ इनको ही लेकर डूबेंगे। इसलिए आप अपना हक लेने के लिए श्रमायुक्त के पास शिकायत करो।

सभी साथी लगाएं आरटीआई

मजीठिया साथियों से मीडिया होल्स यह भी कहना चाहता है कि आप जिस संस्करण में कार्य करते हैं, वहां के श्रमायुक्त या फिर श्रम इंस्पेक्टर के पास सूचना के अधिकार के तहत आवेदन लगाएं। उसमें सम्बंधित अखबार का सर्कुेलेशन, टर्नओवर और सरकारी विज्ञापन की रेट सहित कई जानकारियां लें। यह जानकारी हर साल की अलग-अलग लें। क्योंकि, ये मीडिया मालिक विज्ञापनों की ऊंची कीमत के लिए अपने सर्कुेलेशन और टर्नओवर के आंकड़े भी बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हैं। इसलिए इन्हीं कागजों के जरिए इनकी सारी झूठ सामने आ जाएगी।