अखबार मालिकों के षड्यंत्र से रहें दूर, सुप्रीम कोर्ट ही सुनेगा अवमानना केस

नई दिल्ली। मजीठिया मामले में अभी ४ अक्टूबर को हुई सुनवाई के बाद राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर समेत सभी समाचार-पत्र प्रबंधन यह अफवाह फैला रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई नहीं करेगा और श्रम कोर्ट में ही इस केस का निपटारा होगा। इसके पीछे ये टाइम्स ऑफ इण्डिया की एक याचिका का हवाला दे रहे हैं, जिसे पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने बंद कर दिया था। यह याचिका वहां की यूनियन ने लगाई थी। अब यूनियन और टाइम्स प्रबंधन के बीच कोई समझौता हो गया है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को बंद कर दिया। बाकी समाचार-पत्रों के प्रबंधन इस तथ्य को छुपाकर यह अफवाह फैला रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट इस केस की सुनवाई नहीं करेगा और मजीठिया केस की सुनवाई श्रम कोर्ट में ही होगी। अखबार प्रबंधन चाहते हैं कि नए लोग केस में ना जुड़ेें और सुप्रीम कोर्ट में नहीं जाएं। साथ ही जो लेाग केस में हैं, उनमें से भी कई टूटकर उनके पास आ जाएं। क्योंकि, उन्हें पता है कि जो सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया, उसे तो मजीठिया का लाभ देना ही होगा। ऐसे में वे लोगों को भ्रमित करना चाह रहे हैं।

पत्रिका प्रबंधन की यह है मंशा

राजस्थान पत्रिका ने यह आदेश अपने सभी ब्रांच मैनेजरों को भेज दिया है और उनको कहा है कि जोर लगाकर याचिकाकर्ताओं को मनाओ। उन्हें समझाओं कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई नहीं करेगा और श्रम कोर्ट में पांच-दस साल लग जाएंगे। ऐसे में उनका याचिका लगाने का कोई मतलब नहीं है। ऐसा भ्रम फैलाकर पत्रिका प्रबंधन सुप्रीम कोर्ट में अपने खिलाफ लगी हुई अवमानना याचिकाओं को विद्ड्रॉ कराना चाहता है।

सिर्फ केस करने वालों को ही मिलेगा मजीठिया का लाभ

इसलिए साथियों आप हिम्मत ना हारें, सुप्रीम कोर्ट में ही अवमानना का मामला चल रहा है। वह श्रम कोर्ट में नहीं जा सकता है। क्योंकि, जो कोर्ट ऑर्डर देता है, वही अवमानना का मामला सुनता है। ये अखबार मालिक यह चाहते हैं कि कर्मचारी दिशा भ्रमित हो जाएं और नए लोग सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाएं। क्योंकि, अभी हाल ही के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से यह साबित हो गया है कि जो केस करेगा, मजीठिया का लाभ उसे ही मिलेगा। केस नहीं करने वाले साथियों को अखबार मालिक कुछ भी नहीं देंगे।