जयपुर में दैनिक भास्कर को झटका, 120 नए कर्मचारी गए श्रम आयुक्त की शरण में

जयपुर। दैनिक भास्कर के जयपुर मुख्यालय से सूचना है कि यहां पर कर्मचारियों ने उसे जोर का झटका धीरे से दिया है। सुप्रीम कोर्ट में फैसले की घड़ी नजदीक आते ही दैनिक भास्कर प्रबंधन ने अपनी मक्कारी दिखानी शुरू कर दी। जो कर्मचारी अभी तक सुप्रीम कोर्ट की शरण में नहीं गए थे, उनसे भास्कर प्रबंधन ने स्टाम्प पेपर पर हस्ताक्षर कराना शुरू कर दिया था। सूत्रों के मुताबिक इसमें मजीठिया बेज बोर्ड नहीं चाहने और संस्थान की ओर से दी जा रही सैलेरी से सन्तुष्टि की बात लिखी थी। साथ ही दैनिक भास्कर से इस्तीफा देकर नई कम्पनी में ज्वॉइन करना भी लिखा था। कई लोगों ने तो इस पर आपत्ति नहीं की और चुपचाप हस्ताक्षर कर दिए। लेकिन कई ने इस पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया और श्रम इंस्पेक्टर के यहां मजीठिया बेज बोर्ड का एरियर और सैलेरी नहीं के साथ ही भास्कर प्रबंधन की ओर से प्रताड़ित करने की शिकायत भी कर दी है। सूत्रों का कहना है कि ऐसे कर्मचारियों की संख्या करीब 120 है। इनमें सम्पादकीय, मार्केटिंग, वितरण विभाग सहित कई विभागों के कर्मचारी शामिल हैं। इन कर्मचारियों का कहना है कि जब भास्कर प्रबंधन जबरदस्ती इस्तीफा ले रहा है तो फिर भविष्य तो अच्छा दिख नहीं रहा है। ऐसे में कम से कम अपना हक लेकर तो संस्थान छोड़ो। इनका कहना है कि भास्कर प्रबंधन की इस चाल से साबित हो गया है कि वह सिर्फ कोर्ट गए कर्मचारियों को ही मजीठिया के अनुसार एरियर देगा बाकी को मिलेगा बाबाजी का ठुल्लू। उधर, राजस्थान पत्रिका से भी कई नए कर्मचारियों ने श्रम आयुक्त के यहां मजीठिया के अनुसार एरियर और सैलेरी नहीं मिलने की शिकायत दी है। ये कर्मचारी अभी तक सुप्रीम कोर्ट नहीं गए थे। इनमें कुछ तो अभी रिटायर हुए कर्मचारी हैं और कुछ वे कर्मचारी हैं, जो अभी तक यह मान कर चल रहे थे कि मजीठिया का हक सभी को मिलेगा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के 14 फरवरी के आदेश और प्रबंधन की खामोशी को देखकर उन्हें अंदाजा लग गया कि अब चुप बैठने से काम नहीं चलेगा, अब तो शिकायत करनी ही पड़ेगी। हालांकि, असल तस्वीर 30 मई को ही पता चलेगी। क्योंकि, श्रम आयुक्त ने 30 मई तक ही शिकायत लेने की बात कही है। उसके बाद ही पता चलेगा कि दोनों समाचार-पत्रों से कुल कितने नए कर्मचारियों ने शिकायत लगाई है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि श्रम आयुक्त के पास कर्मचारी 30 जून तक शिकायत दे सकते हैं। अब आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बाकी बचे कर्मचारियों को दैनिक भास्कर और राजस्थान पत्रिका प्रबंधन आखिर किस तरह रोके रखते हैं।