यूपी में अखबार मालिकों की शामत, छह पेज के प्रपत्र में मांगी ली पूरी कुण्डली

जयपुर। अखबार मालिकानों के डर के चलते जो साथी अभी तक मजीठिया केस में नहीं गए हैं। उन सभी को मजीठिया संघर्ष समिति, जयपुर की सलाह है कि महाभारत में धृतराष्ट्र तो जन्मांध था, लेकिन गांधारी ने तो आंखें होते हुए भी पट्टी बांध ली थी। उसका दुष्परिणाम यह हुआ कि उसके सारे बेटे मृत्यु को प्राप्त हुए। इसलिए इस बात के जरिए उन साथियों से हमारी अपील है कि आप जानबूझकर अपना हक ना छोड़ें, अखबार मालिकानों से डरें नहीं, सुप्रीम कोर्ट के रूख को देखकर आपको समझ जाना चाहिए कि न्याय में अब ना देर और ना अंधेर है। आप डर के मारे केस नहीं कर रहे और ये मीडिया मालिक आपको आपका हक नहीं देने वाले हैं।

यूपी में अखबार मालिकों के छापा

23 अगस्त को हुई सुनवाई के बाद उत्तरप्रदेश सहित पांचों राज्यों के श्रमायुक्त एक्शन में आ गए हैं। वे वहां अखबारों के ऑफिसों में छापा मार रहे हैं और कर्मचारियों से मजीठिया के बारे में पूछ रहे हैं। श्रमायुक्त की इस कार्रवाई से अमर उजाला, दैनिक जागरण और दैनिक हिन्दुस्तान सरीखे अखबार मालिकानों की हवा टाइट हो गई है। सूत्रों का कहना है कि इन अखबार के ऑफिसों से श्रमायुक्त की टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त किए हैं और कई कर्मचारियों से पूछताछ में उन्हें पता चला है कि किसी को भी मजीठिया का लाभ नहीं दिया गया है। ऐसे में अगर आप इस वक्त अपने हक के लिए खड़े नहीं हुए तो फिर स्वयं भगवान भी आपको हक नहीं दिलवा पाएंगे। आप सब कुछ जानते हुए भी गांधारी की तरह आंखों पर पट्टी बांधें तमाशा देख रहे हो। याद रखना मजीठिया की लड़ाई खत्म होने के बाद अखबार मालिकान आपको तमाशा बना देंगे।

केस नहीं गए कर्मचारी इसे जरूर पढ़ें

23 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की फटकार का असर उत्तरप्रदेश में दिखने लगा है। अपनी खाल बचाने के लिए अब वहां का लेबर डिपार्टमेंट असल जांच करने में जुट गया है। वहां अखबार मालिकों की शामत आ गई है। यूपी के श्रमायुक्त ने 27 अगस्त को आदेश जारी किया है, जिसके बाद यूपी के सभी क्षेत्रों के उप /अपर श्रमायुक्तों ने सम्बंधित जिलों से प्रकाशित अखबारों के प्रबंधनों को छह पेज का प्रपत्र भेजकर पूरी कुण्डली तलब की है। इस प्रपत्र में कुल छह टेबल संलग्न हैं और छठा यानी एफ टेबल खुद कर्मचारी को निरीक्षणकर्ता अधिकारी के सामने भरना है। उत्तरप्रदेश के एक साथी योगेश गुप्त से मजीठिया संघर्ष समिति, जयपुर को वह आदेश प्राप्त हुआ है। आप खुद इस प्रपत्र का अवलोकन कीजिए और राजस्थान की सुनवाई का इंतजार करिए।