पत्रिका सम्पादक कर रहे राम नाम पर लूट

कोयम्बटूर। राम नाम जपना...पराया माल अपना। जी हां, कुछ इसी तरह की राम नाम पर लूट हो रही है राजस्थान पत्रिका के कोयम्बटूर ऑफिस में। सूत्रों का कहना है कि कोयम्बटूर के पास ही त्रिपुर नामक एक जगह है। त्रिपुर में हर रविवार को रामायण का पाठ होता है। रामायण का पाठ वहां के कपड़ा व्यापारी कराते हैं। चूंकि, रामायण पाठ की खबर दो बार लगती है। एक बार तो रामायण पाठ होगा और दूसरी रामायण पाठ हो गया। हालांकि, खबर दो बार लगने से समस्या नहीं है। समस्या यह है कि खबर प्रकाशित होने के बाद हर बार व्यापारियों की तरफ से राजस्थान पत्रिका कोयम्बटूर सम्पादक के पास शानदार टी-शट्र्स का पैकेट उपहारस्वरूप आता है। सूत्रों का कहना है कि सम्पादक महोदय रोजाना नई-नई टी-शट्र्स पहनकर ऑफिस आते हैं। उनकी कोई शिकायत ना कर दे, इसलिए वे कई बार इन टी-शट्र्स को स्टाफ में भी बंटवा चुके हैं। यानी हर रविवार को राम नाम पर पत्रिका के सम्पादक व्यापारियों को ठग रहे हैं। व्यापारी भी क्या करें, सूत्रों का कहना है कि व्यापारी खबर प्रकाशित करवाने के लिए मजबूरीवश टी-शट्र्स भेजते हैं।

विज्ञापन का कमीशन भी जेब में

सूत्रों का यह भी कहना है कि राजस्थान पत्रिका कोयम्बटूर संस्करण में सम्पादक महोदय विज्ञापन भी सीधे ना लेकर एजेंसियों के जरिए बुक करवा रहे हैं। जिससे विज्ञापन का कमीशन उनकी जेब में जाए। इससे कम्पनी को भी दिक्कत नहीं है, क्योंकि, उसे विज्ञापन मिल रहा है। सूत्रों का कहना है कि बिना एजेंसी के आने वाले विज्ञापनों को भी सम्पादक महोदय कमीशन के चक्कर मेंएजेंसी के जरिए समाचार-पत्र में प्रकाशित करवा रहे हैं। खैर गलती सम्पादक महोदय की नहीं है। पत्रिका प्रबंधन की है, वह इतनी सैलेरी नहीं देती कि कोई भी अपना घर अच्छे से चला पाए। फिर मजीठिया वेज बोर्ड का हक भी नहीं दे रही है। ऐसे में कोई भी हो, वह येन-केन प्रकारेण मजीठिया की पूर्ति तो कहीं ना कहीं से करेगा ही।