राजस्थान पत्रिका ने किया तबादला, कोर्ट की शरण में कर्मचारी

जयपुर। मजीठिया मामले में अभी हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अखबार मालिकानों में बेचैनी का आलम है। अब उन्हें सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि जो कर्मचारी अभी तक सुप्रीम कोर्ट नहीं गए थे, उन्हें कैसे रोका जाए? क्योंकि, अखबार मालिकानों को डर है कि सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद कहीं उन कर्मचारियों में जोश ना आ जाए और वे श्रम आयुक्त के पास अपनी शिकायत दर्ज ना करा दें। इसलिए अखबार मालिकान अब ऐसे कर्मचारियों में से कुछ का तबादला दूर कर रहे हैं, जिससे अन्य कर्मचारियों में डर पैदा हो जाए और कोई भी श्रम आयुक्त के पास शिकायत दर्ज ना करा पाए। इसी कड़ी में राजस्थान पत्रिका के जयपुर कार्यालय से सूचना है कि उसने विज्ञापन में से पांच जनों का तबादला किया था, लेकिन इनमें से तीन जनों से हाथा-जोड़ी और गोटी बिठाकर अपना तबादला निरस्त करवा लिया है। वहीं वितरण विभाग में काफी लम्बे अरसे से कार्यरत जगदीश शर्मा का तबादला छत्तीसगढ़ कर दिया गया। इससे नाराज जगदीश शर्मा ने लेबर कोर्ट में तबादले को तो चैलेंज कर ही दिया है, वहीं मजीठिया का केस लड़ रहे अन्य साथियों के साथ मिलकर श्रम आयुक्त के पास वेज बोर्ड और सैलेरी ना देने की शिकायत करने का भी मन बना लिया है। वे मजीठिया का केस लड़ रहे साथियों से इस बारे में पूरी जानकारी ले रहे हैं। राजस्थान पत्रिका के अंदरखाने से सूचना आ रही है कि अभी अप्रेल माह चल रहा है, इस दौरान वेतन वृद्धि होती है। अभी कर्मचारी इस माह बढ़ने वाली सैलेरी की बाट जोह रहे हैं। उनका कहना है कि यदि इस माह अच्छी खासी वेतन वृद्धि हो गई तो ठीक वरना हम भी श्रम आयुक्त के पास एरियर और सैलेरी नहीं देने की शिकायत लगाएंगे। वहीं राजस्थान पत्रिका मैनेजमेंट इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। मैनेजमेंट के गुर्गे उन्हें हक की लड़ाई लड़ रहे साथियों की पूरी जानकरी दे रहे हैं। मैनेजमेंट आधे जून तक यह देखेगा कि किस-किस ने श्रम आयुक्त के पास शिकायत लगाई है। इसके बाद वह शिकायतकर्ताओं को उनका पैसा दे देगा। इससे राजस्थान पत्रिका का केस यहीं पर खत्म हो जाएगा और जो कर्मचारी यह बाट जोह रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वे ऑर्डर की कॉपी के साथ बाद में अपना एरियर ले लेंगे, उन्हें निराशा हाथ लगेगी। क्योंकि, जब केस श्रम आयुक्त के पास ही खत्म हो जाएगा तो सुप्रीम कोर्ट कोई आदेश देगी ही नहीं और जब कोई आदेश आएगा ही नहीं तो बाकी कर्मचारी किस आधार पर सुप्रीम कोर्ट में जाएंगे। यानी सुप्रीम कोर्ट ने अपने ताजा आदेश में सभी कर्मचारियों को अपना हक लेने के लिए अंतिम मौका दिया है, अब गेंद कर्मचारियों के पाले में है कि वे अपना हक लेना चाहे या नहीं ? बाद में उन्हें कुछ नहीं मिलने वाला है। किसी ने भी क्या खूब कहा है कि स्वर्ग जाने के लिए स्वयं को मरना ही पड़ता है। यह तो नहीं हो सकता कि मरे और कोई और स्वर्ग जाएं हम।