राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर के  कर्मचारी  सीए से लगवा रहे हिसाब, श्रमायुक्त के पास करेंगे शिकायत

जयपुर। मजीठिया मामले में 14 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बारे में तो सभी को पता है। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारियों का पक्ष लिया है और अखबार मालिकानों को जोर का झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस रूख से केस लड़ रहे कर्मचारियों में तो उत्साह का माहौल है ही, अब धीरे-धीरे उन कर्मचारियों में भी हिम्मत आ रही है, जो अभी तक यह समझ कर चल रहे थे कि मजीठिया केस में अखबार मालिक हार ही नहीं सकते। अपने साथी कर्मचारियों की हिम्मत और सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा रूख से वे भी मन ही मन खुश हैं। अब उन्हें भी पता चल चुका है कि अखबार मालिकानों की नीयत सभी को मजीठिया देने की नहीं है। राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर सहित तमाम अखबारों के वे कर्मचारी जो अभी तक सुप्रीम कोर्ट में नहीं गए थे, वे अब ताजा आदेश के तहत श्रम आयुक्त के पास शिकायत करने का मन बना रहे हैं। कई कर्मचारी गुपचुप तरीके से सीए के पास जा रहे हैं। वे सीए से अपना एरियर, अंतरिम राहत और मजीठिया के हिसाब से सैलेरी का हिसाब बनवा रहे हैं, जिससे श्रमायुक्त के पास पूरे कागजातों के साथ शिकायत की जा सकें। वहीं राजस्थान पत्रिका और दैनिक भास्कर के कुछ कर्मचारी अप्रेल के इंक्रीमेंट का इंतजार कर रहे हैं। इन कर्मचारियों का कहना है कि पहले हम अप्रेल माह का इंक्रीमेंट देख लेते हैं, यदि अखबार मालिकान अप्रेल माह की सैलेरी मजीठिया के हिसाब से दे देते हैं, तो ठीक है, नहीं तो अप्रेल माह की सैलेरी मिलने के बाद ये भी श्रमायुक्त के पास अपनी शिकायत करेंगे। यानी देर-सवेर करीब सभी कर्मचारी मजीठिया के लिए प्रबंधन से दो-दो हाथ करने को तैयार दिख रहे हैं। क्योंकि, इन कर्मचारियों को अहसास हो चुका है कि अब डरने से नहीं लड़ने से काम चलेगा। अखबार मालिकान जितना कर्मचारियों का बिगाड़ सकते थे, वे बिगाड़ चुके हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के डंडे ने उन्हें उनकी सीमा का अहसास करा दिया है। डंडे की पूरी मार 19 जुलाई को उन्हें और पता चल जाएगी। यानी मजीठिया मामले में अब अखबार मालिकों के होश उड़ने वाले हैं, पहले तो उनकी मंशा सिर्फ केस वालों को ही मजीठिया का हक देने की थी, लेकिन, जब सारे ही केस में चले जाएंगे तो फिर ये किसे छोड़ेंगे और किसे देंगे।