राजस्थान श्रमायुक्त ने सुप्रीम कोर्ट में जमा कराई स्टेटस रिपोर्ट, दिया गोलमोल जवाब

जयपुर। माननीय सुप्रीम कोर्ट की ओर से 14 मार्च को दिए गए आदेश की पालना में राजस्थान श्रमायुक्त ने अपनी रिपोर्ट जमा करा दी है। रिपोर्ट को पढ़कर साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि श्रमायुक्त ने मीडिया मालिकों का दबी जुबान पक्ष लिया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के डर के चलते उन्होंने कर्मचारियों की पीड़ा का भी जिक्र किया है। रिपोर्ट बेहद सधी हुई बनाई है। रिपोर्ट पढ़कर प्रारम्भिक तौर पर यह नहीं कहा जा सकता कि उन्होंने सिर्फ कर्मचारियों का ही पक्ष लिया है। श्रमायुक्त ने रिपोर्ट में क्या लिखा है, उसे जानने का अधिकार सभी मजीठिया कर्मचारियों के साथ ही उनके लिए भी महत्वपूर्ण है, जो अभी तक मीडिया मालिकों के डर के चलते अपने हक की आवाज बुलंद नहीं कर पाए हैं।

रिपोर्ट का मजमून

रिपोर्ट के मुताबिक श्रमायुक्त ने लिखा है कि हमने माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक राज्य के सभी अखबारों को नोटिस देकर मजीठिया मामले में रिपोर्ट मांगी। श्रमायुक्त को डीबी कॉर्प के स्वामित्व वाले दैनिक भास्कर के वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों की ओर से कुल 307 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें लिखा हुआ था कि भास्कर प्रबंधन ने जबरदस्ती उनसे एक प्री-टाइप्ड कागज पर हस्ताक्षर करा लिए, जिसे अब प्रबंधन 20 जे में अंडरटेकिंग बता रहा है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में केस करने पर प्रबंधन कर्मचारियों के तबादले और बर्खास्तगी जैसे कार्य भी कर रहा है। कुछ ऐसी हीं शिकायतें राजस्थान पत्रिका के कर्मचारियों ने की हैं। इस पर श्रमायुक्त ने दोनों अखबारों के प्रबंधन को नोटिस देकर इनका जवाब मांगा। इस पर दैनिक भास्कर और राजस्थान पत्रिका दोनों के प्रबंधन का कहना है कि मजीठिया मामले में 20 जे का प्रावधान है। इसके तहत निर्धारित अवधि में यदि कर्मचारी स्वेच्छा से यह लिखकर दे देता है कि वह वर्तमान सैलेरी से खुश है, तो उसे मजीठिया का लाभ नहीं दिया जाएगा। इसी के तहत कर्मचारी स्वेच्छा से निर्धारित अवधि में लिखकर हमें अंडरटेकिंग दे चुके हैं।

तबादला प्रशासनिक हित और कानूनी प्रक्रिया से बर्खास्तगी

साथ ही तबादले के बारे में कहा है कि तबादला प्रशासनिक हित को ध्यान में रखकर किए जा रहे हैं। वहीं बर्खास्तगी पर कहा है कि इस दौरान पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है। दोनों अखबार प्रबंधनों ने यह भी लिखा है कि कर्मचारियों के हस्ताक्षर किए हुए रजिस्टर उनके पास है, इस पर श्रमायुक्त ने लिखा है कि दोनों ही प्रबंधन ऐसा कोई भी रजिस्टर बतौर सबूत पेश नहीं कर पाए हैं, जिससे यह साबित हो कि कर्मचारियों ने अंडरटेकिंग निर्धारित अवधि में ही दी है। श्रमायुक्त ने कर्मचारियों की ओर से प्राप्त शिकायतें और प्रबंधन की ओर से प्राप्त जवाब को ही लिखकर अपनी रिपोर्ट बना दी है। उन्होंने अपनी ओर से इस पर कोई टिप्पणी नहीं लिखी, जबकि श्रमायुक्त को पता है कि प्रबंधन कर्मचारियों के साथ गलत कर रहे हैं। खैर कोई बात नहीं, कर्मचारियों को राज्य के डरपोक श्रमायुक्त से कोई बहुत ज्यादा उम्मीद भी नहीं थी, अब मीडिया मालिकों को 19 जुलाई से सुप्रीम कोर्ट अपनी ताकत का अहसास कराएगा। कर्मचारी भी उसी दिन का इंतजार कर रहे हैं। एक बात और श्रमायुक्त के पास दैनिक नवज्योति से दो और पंजाब केसरी से एक कर्मचारी ने मजीठिया का हक नहीं देने की शिकायत भी की है।