पत्रिका के सर्कुलेशन विभाग को सपने में क्यों दिखती है ट्रेन... जानिए

कोयम्बटूर। अखबारी दुनिया से जुड़े हुए सभी साथियों इस खबर को आप जरूर पढ़िए। राजस्थान पत्रिका पाठकों के दिल से कैसे उतर रहा है, इसका ताजा उदाहरण और देखिए। जयपुर मुख्यालय पर दैनिक भास्कर से प्रतिस्पर्धा के चलते राजस्थान पत्रिका भी कई सप्लीमेंट निकालता है। इनमें से एक है मी डॉट नेक्स्ट नाम का एजुकेशन सप्लीमेंट। इसे मुख्य राजस्थान पत्रिका के साथ सप्ताह में एक दिन फ्री में बांटा जाता है। चूंकि, राजस्थान में भी लगातार पत्रिका का सुर्कलेशन गिर रहा है। ऐसे में ये सप्लीमेंट भी काफी संख्या में बच रहा है। इसे उपयोग करने के लिए राजस्थान पत्रिका अपने नए सेंटर्स का सहारा लेता है, वहां पर ऐसे सप्लीमेंट को अखबार के साथ बंटवाया जाता है, जिससे नई जगह सर्कुलेशन बढ़ाया जा सके।

अखबार उतारना ही भूले

इसी सोच के चलते जयपुर मुख्यालय से वाया ट्रेन मी डॉट नेक्स्ट सप्लीमेंट को कोयम्बटूर भेजा गया। लेकिन, सर्कुलेशन अधिकारियों की लापरवाही देखिए, किसी को भी याद नहीं रहा कि आज अखबार आने वाला है। याद आया तब तक रेलगाड़ी केरल पहुंच गई थी। वहां फोन किया गया, लेकिन वहां भी अखबार को लेने वाला कोई नहीं मिला। आखिर में अखबार कहां गया, यह किसी को नहीं पता और कोयम्बटूर सेंटर्स पर मी डॉट नेक्स्ट सप्लीमेंट नहीं बंट पाया।

सर्कुलेशन वालों को पता था कोई फायदा नहीं

काफी प्रयासों के बाद भी राजस्थान पत्रिका कोयम्बटूर में पाठकों के दिल में जगह नहीं बना पाया है। ज्यादातर अखबार सरकारी ऑफिसों में जा रहा है, वह भी फ्री में। कोयम्बटूर में रहने वाले कुछ राजस्थानी परिवार ही उसे खरीद रहे हैं। लेकिन, उनकी संख्या इतनी नहीं है कि उससे अखबार को आर्थिक लाभ हो। साथ ही वहां विज्ञापनदाता नहीं मिलने से पूरा अखबार खबरों से भरना पड़ रहा है। वहां के सम्पादकीय विभाग के लोग बड़ी मुश्किल से समाचार-पत्र को निकाल रहे हैं। यह सब स्थिति देखकर सर्कुलेशन वालों ने सोचा होगा कि जब अखबार को खरीददार ही नहीं मिल रहे तो सप्लीमेंट बांटो या कुछ और, क्या फायदा। इसलिए उन्होंने इस बात को गंभीरता से नहीं लिया और ट्रेन से अखबार को नहीं उतारा।