जयपुर श्रम कोर्ट प्रथम में पत्रिका के वकील और गुर्गों ने मुंह की खाई

जयपुर। राजधानी के मिनी सचिवालय स्थित श्रम न्यायालय, प्रथम में सोमवार को गजब का माहौल था। न्यायालय में जिधर देखों पत्रकारों का हुजूम और सभी में जबरदस्त उत्साह। सभी पत्रकार न्यायालय की ओर से आए नोटिस की अनुपालना में स्टेटमेंट ऑफ क्लेम देने गए थे। पत्रिका के गुर्गे भी वहां आए हुए थे। इतनी बड़ी संख्या में पत्रकारों को वहां देखकर गुर्गों की आंखें चुधिया गईं। गुर्गे चुपचाप अपने वकील के साथ एक कोने में दुबक गए। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि पत्रकारा इतने उत्साह से न्यायालय में आएंगे। बात यहीं खत्म हो जाती तो और बात थी। लेकिन, असल बात इसके बाद ही शुरू होती है। काफी इंतजार के बाद माननीय न्यायाधीश के समक्ष दोनों वकील गए। पत्रकारों की ओर से ऋषभ चन्द जैन और मालिकों की ओर से रूपिन काला हाजिर हुए। ऋषभ जैन ने स्टेटमेंट ऑफ क्लेम प्रस्तुत करते हुए माननीय न्यायाधीश को अवगत कराया कि 109 कर्मचारियों के क्लेम, 77 कर्मचारियों के शपथ-पत्र पेश किए और चार कर्मचारियों के लिए न्यायालय से समय मांग लिया। इसके बाद ऋषभ जैन ने माननीय न्यायाधीश को अगवत कराया कि चूंकि यह मामला कम्पनी और कर्मचारियों के बीच का है। ऐसे में इस मामले में पत्रिका किसी वकील को जिरह के लिए खड़ा नहीं कर सकती। पत्रिका किसी कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधि को खड़ा कर सकती है और कर्मचारियों के स्टेटमेंट ऑफ क्लेम के दस्तावेज भी उसे ही दिए जाएं। इस पर पत्रिका के गुर्गों और वकील के तोते उड़ गए। उनका वकील गुर्गों को लेकर खीझ निकालता हुआ न्यायालय से बाहर चला गया और कहा ठीक है, कर्मचारी प्रतिनिधि लेकर आते हैं।

सिर पकड़ कर बैठ गए गुर्गे

इसके बाद प्रबंधन के गुर्गे और वकील न्यायालय की सीढ़ियों में जाकर सिर पकड़कर बैठ गए और इस चक्रव्यूह से निकलने का कोई रास्ता खोजने लगे। काफी देर मशक्कत के बाद करीब आखिर वे सभी कर्मचारी प्रतिनिधि को खोजने लगे। लेकिन, उन्हें कोई नहीं मिला। पत्रिका के गुर्गे इस बात से ज्यादा डर रहे थे कि आका के पास किसी मुंह से जाएंगे। उन्हें क्या बताएंगे कि ना तो सरकार विज्ञापन दे रही और ना ही जज साहब स्टेटमेंट ऑफ क्लेम के दस्तावेज।

गुर्गों और वकील की सिट्टी-पिट्टी गुम

इस घटनाक्रम से पहले न्यायालय में पत्रकारों की पूरी फौज देखकर गुर्गे और वकील के होश उड़ गए। पत्रिका के गुर्गों और मालिकों ने यह सपने में भी नहीं सोचा था कि पत्रकार इतनी तैयारी के साथ आएंगे। उन्हें इसका तनिक भी भान नहीं था कि इतने कम समय में राजस्थान के पूरे पत्रकारों के स्टेटमेंट ऑफ क्लेम तैयार हो जाएंगे। उन्होंने सिर्फ यह सोचा था कि जयपुर के पत्रकारों के ही स्टेटमेंट ऑफ क्लेम प्रस्तुत होंगे। ऐसे में नियत तिथि पर दूसरे जिलों के पत्रकारों के क्लेम प्रस्तुत नहीं होने पर न्यायालय से उन्हें खारिज करवा कर, यह मामला ही बन्द करवा देंगे। लेकिन, मजीठिया पत्रकारों की एकजुटता और मेहनत देखकर पत्रिका प्रबंधन के गुर्गों और वकील की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई।