अधिकारी खुद करेंगे सफाई और भरेंगे पानी

जयपुर। राजस्थान पत्रिका प्रबंधन ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को हटाने का फरमान जारी कर दिया है। लेकिन, मालिकों को इस तरह का ज्ञान देने वाले चमचे टाइप अधिकारियों ने शायद इसके प्रभावों का गहनता से अध्ययन नहीं किया। अगर वे गहनता से अध्ययन करते तो शायद मालिकों को इस तरह का ज्ञान नहीं देते। मीडिया होल्स ने बारीकी से इसे समझा और इससे होने वाले असर को आप तक पहुंचा रहा है।

जनाब इन पर गौर फरमाइएगा

अगर राजस्थान पत्रिका की बात की जाए तो अभी तक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मालिकों और अधिकारियों की सेवा में तैनात रहते आए हैं। अब इनको हटाने से अधिकारियों के केबिन की सफाई कौन करेगा, उन्हें पानी भरकर कौन पिलाएगा। अधिकारियों को लैपटॉप को उनकी गाड़ी तक कौन पहुंचाएगा, अधिकारियों के लिए नाश्ते का इंतजाम कौन करेगा। इस तरह के कई कार्य हैं, जो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अभी तक करते रहे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि जब अधिकारी के पास कोई अतिथि मिलने आएगा, तब उसे पानी कौन पिलाएगा। जाहिर सी बात है कि अब अधिकारी खुद का पानी भी भरकर लाएंगे और मेहमानों को भी वही पिलाएंगे।

चमचों में मचेगी होड़

माफ कीजिएगा, हमें तो उनका खयाल ही नहीं रहा। उनका मतलब अधिकारियों की केबिन के इर्द-गिर्द घूमने वालों का, उनका मतलब अधिकारियों की उठाने वालों का, उनका मतलब अधिकारी के पास बैठने के लिए उनके कई चक्कर लगाने वालों का। ठीक समझे उनका मतलब चमचों का। आखिर विपदा में अपने ही तो काम आते हैं। वे काम नहीं आएंगे तो आखिर कौन आएगा। ऐसे चमचे टाइप के लोग जब कैंटीन में चाय बोलकर अधिकारी के साथ गपशप मार सकते हैं तो उनके लिए बोतल में पानी भरकर भी ला सकते हैैं। उनके कम्प्यूटर्स और कुर्सी की धूल भी साफ कर ही सकते हैं। भला अपना तो अपना ही होता है। हालांकि, इस मामले में भी चमचों में कॉम्पिटिशन देखने को मिल सकता है। कोई भी चमचा इस सुनहरे मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहता है। हर कोई इसे कैश करने की सोच रहा है। आखिर पानी पिलाना तो पुण्य का कार्य है। इसमें काहे की शर्म। शर्म नाम की किसी चीज को तो वो जानते ही नहीं है। वैसे भी किसी ने खूब कहा है, जिसने की शरम, उसके फूटे करम। इसलिए चमचों में अब होड़ मचेगी कि भाईसाहब को ज्यादा से ज्यादा पानी कौन पिलाए, जिससे समय आने पर भाईसाहब उन्हें तरा सके।