नोटबंदी का डर, पत्रिका मालिकों ने शुरू की बचत

जयपुर। जबसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 500 और 1000 रूपयों के नोटबंदी की घोषणा की है, तभी से हर आम और खास परेशान है। गरीब तो पहले से ही परेशान था, इस नोटबंदी ने अमीर लोगों की भी नींव हिला दी हैं। पहले अमीर लोग राशन-पानी का हिसाब ही नहीं रखते थे। उनके घर में बेहिसाब राशन-पानी आता था। लेकिन, अब नोटबंदी ने उन्हें राशन का हिसाब रखना भी सिखा दिया है। नोटबंदी की मार राजस्थान पत्रिका के मालिकों पर भी पड़ी है।

रखा जा रहा है पाई-पाई का हिसाब

सूत्रों का कहना है कि पहले परिवार के लोगों और बंगले पर तैनात स्टाफकर्मियों के लिए खूब राशन आता था। खाने और चाय-पानी की कोई कमी नहीं थी। लेकिन, नोटबंदी के बाद से पाई-पाई का हिसाब रखा जा रहा है। स्टाफकर्मियों पर खर्च होने वाले राशन पर पैनी नजर रखी जा रही है और इसमें कैसे कटौती की जाए, इस पर दिमाग लगाया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो जल्द ही बंगले पर तैनात स्टाफकर्मियों के राशन पर कैंची चलने वाली है।

चाय में कम हुई चीनी और अदरक!

सूत्रों का कहना है कि सर्दियां शुरू हो गई हैं। ऐसे में चाय हर किसी को अच्छी लगती है। नोटबंदी से पहले बंगले पर तैनात स्टाफ कितनी चाय पी रहा है, इस पर कोई ध्यान नहीं देता था। लेकिन, अब हालात बदल गए हैं। अब यह ध्यान रखा जा रहा है कि कितना दूध, चाय-चीनी और अदरक आ रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि अभी कुछ दिनों पहले मालिकों ने कहा था कि इतना दूध और चीनी क्यों आ रहा है, इसे कम करो। रोजाना इतनी अदरक कैसे खत्म हो रही है। इसे कम करने पर ध्यान दो। सूत्रों की मानें तो स्टाफकर्मियों की अब चाय भी कम होने वाली है। हालांकि, दिन में एक कर्मचारी को दो चाय से ज्यादा नहीं पिलाने के आदेश हो चुके हैं।

कर्मचारियों की सुविधाओं पर ताला

सूत्रों का कहना है कि नोटबंदी के बाद मालिकों ने इस पर ध्यान देना शुरू कर दिया है कि खर्चा कैसे कम किया जाए। जानकार लोगों का कहना है कि खर्चा कम करने के नाम पर कर्मचारियों को मिल रहीं कुछ सुविधाओं को भी खत्म किया जा रहा है। यदि वास्तव में ही खर्चा कम करना है तो अपनी फिजूलखर्ची पर लगाम लगाओ। बड़े-बड़े अधिकारियों को दी जा रहीं सुविधाओं को कम करो। लेकिन, वे ऐसा करेंगे नहीं...वे सिर्फ कर्मचारियों पर ही जोर चलाना जानते हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट इनको एक दिन जरूर आईना दिखा देगा।