10 दिन से प्रकाशित नहीं हो रहा नेशनल दुनिया अखबार, खतरे में मान्यता

जयपुर। बड़े-बड़े वादों और सपनों के साथ जयपुर आए नेशनल दुनिया की धरती तीन साल से पहले ही खिसक गई। हालांकि, नेशनल दुनिया अखबार ने शुरुआत में अच्छी ओपनिंग की थी और मोटी सैलेरी में राजस्थान पत्रिका और दैनिक भास्कर के कर्मचारियों को तोड़ा था। लेकिन, मोटी सैलेरी वाले कर्मचारियों और प्रकाशन का खर्च यह ग्रुप ज्यादा दिन नहीं खींच सका। कुछ समय तक तो जैसे-तैसे कर्मचारियों को सांत्वना देकर काम चलाया जा रहा था। कर्मचारी भी बेरोजगार होकर बैठने से अच्छा काम करना मान रहे थे और चार-पांच माह बाद मिलने वाली सैलेरी से ही संतुष्ट हो रहे थे। चार-पांच माह में जब उनका सब्र का बांध टूटने लगता और कर्मचारी हड़ताल पर चले जाते तब प्रबंधन उन्हें एक माह की सैलेरी देकर चुप करा देता। इस बीच कई कर्मचारी मौका मिलते ही दूसरे अखबारों में चले गए। कर्मचारियों की कमी के चलते प्रबंधन ने चार-पांच हजार रुपए में पार्ट टाइम कर्मचारी भर्ती कर लिए। लेकिन, अखबार मालिकों की माली हालत इतनी पतली हो गई कि इन पार्ट टाइमर को भी एक महीने पहले हटाया जा चुका है। वहीं स्थायी कर्मचारियों की सैलेरी करीब 6 माह से नहीं दी जा रही है। इससे खफा होकर कर्मचारियों ने हड़ताल कर रखी है और करीब 15 दिन से अखबार प्रकाशित नहीं हो रहा है। कर्मचारी कार्यालय जाते हैं और हाजिरी करवा कर आ जाते हैं, कोई भी कार्य नहीं कर रहा है। प्रबंधन भी यही चाहता है कि कर्मचारी चले जाएं और अखबार बन्द हो जाए।

कटेगा बिजली कनेक्शन, ऑफिस भी होगा खाली

सूत्रों के मुताबिक अखबार की माली हालत इतनी खराब है कि कई माह का बिजली का बिल भी जमा नहीं कराया गया है। विद्युत विभाग के कई नोटिसों के बाद भी बिल बकाया ही रहा। ऐसे में विद्युत विभाग ने भी इनको अल्टीमेटम दे दिया है। अब किसी भी वक्त विद्युत विभाग कनेक्शन काट सकता है। साथ ही ऑफिस मालिक भी अपना किराया नहीं मिलने से परेशान है। उसने भी किराया नहीं देने की सूरत में ऑफिस खाली करने को कह दिया है। यानी कुछ दिन बाद अखबार के बर्तन-भांडे भी बिक जाएंगे।

कर्मचारी हो गए बेरोजगार

राजस्थान पत्रिका में कभी सम्पादक रहे मनोज माथुर की पत्रिका से छुट्टी होते ही उन्होंने नेशनल दुनिया का दामन थामा था। उनके कहने और मोटी सैलेरी के लालच में राजस्थान पत्रिका और दैनिक भास्कर के कई कर्मचारियों ने नेशनल दुनिया का हाथ थामा था। लेकिन, पहले तो सैलेरी नहीं मिलने और अब अखबार के ही ताले लगने से कर्मचारी मायूस हैं। सारे कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं। उनका कहना है कि हम तो भविष्य की बेहतरी के लिए बड़े ब्रांड छोड़कर आए थे, लेकिन अब तो भविष्य ही अंधकारमय हो गया है।

पीएफ अब तक जमा नहीं, कोर्ट में भी मुंह की खाई

नेशनल दुनिया प्रबंधन ने अभी तक कर्मचारियों की पीएफ राशि भी जमा नहीं कराई थी। इसे लेकर नेशनल दुनिया के पूर्व पत्रकार राकेश शर्मा ने इसकी शिकायत पीएफ कमिश्नर जयपुर को की थी। कमिश्नर ने सात जून को आदेश दिया था कि पन्द्रह दिन के अंदर कर्मचारियों की 11 लाख रुपए की पीएफ राशि जमा कराई जाए, अन्यथा बैंक खाते कुर्क करके राशि वसूली जाएगी। इस मामले में गबन का मामला भी दर्ज किया जाएगा।