पत्रिका प्रबंधन- नाम बड़े और दर्शन छोटे

जयपुर। राजस्थान पत्रिका ने 5 अक्टूबर के अंक में राकेश झुनझुनवाला का इंटरव्यू प्रकाशित किया है। इस इंटरव्यू के जरिए वे पाठकों को यह बताना चाह रहे हैं कि देखिए...कितनी बड़ी मिल्कियत का स्वामी भी अपनी सम्पत्ति को दान देने की सोच रखता है। वे पाठकों को बताना चाह रहे हैं कि रुपया-पैसा यह सब मोह माया है, अंत समय में सब यहीं छोड़कर जाना है। यानी वे पाठकों को इस इंटरव्यू के जरिए उपदेश देना चाह रहे हैं। अब बात करते हैं राजस्थान पत्रिका के मालिकानों की। ये अपने समाचार-पत्र में बातें तो बड़ी-बड़ी प्रकाशित करते हैं, लेकिन असलियत इससे कोसों दूर है। ये खुद अपने कर्मचारियों के हक का करोड़ों रुपया दबाकर बैठे हैं। मजीठिया वेज बोर्ड मांगने वाले कर्मचारियों को बर्खास्त, तबादला और सस्पेंड करके परेशान कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के इन पर सात केस चल रहे हैं। यानी जो मीडिया मालिक कर्मचारियों के हक का पैसा दबाकर बैठा है और कानून की धज्जियां उड़ा रहा है, उसे अपने समाचार-पत्र में इस तरह की उपदेशक खबरें प्रकाशित नहीं करनी चाहिए।

पर उपदेश, कुशल बहुतेरे

यह तो वही बात हो गई, पर उपदेश, कुशल बहुतेरे। यानी उपदेश देने में बहुत अच्छे लगते हैं, लेकिन स्वयं उन पर अमल नहीं करते। राजस्थान पत्रिका के मीडिया मालिक समय-समय पर अपने सम्पादकीय में बहुत बड़ी-बड़ी बातें लिखते हैं, लेकिन स्वयं उनमें से किसी पर भी अमल नहीं करते हैं। बल्कि वे जो कहते हैं, वे उसके उलट आचरण करते हैं। हम सिर्फ उन्हें यही कहना चाहेंगे कि जैसा आप लिखते हैं, वैसा ही यदि आचरण करें तो बहुत अच्छा होगा। कर्मचारियों को परेशान करना बंद करें, वे अपना हक ही तो मांग रहे हैं, इसके अलावा कभी आपने उनको कुछ दिया हो तो बताओ और उन्होंने आपसे कुछ मांगा हो तो बताओ। जब सरकार ने आपके हक के सरकारी विज्ञापन रोक लिए तो आपको भी तो दर्द हुआ और आपने अपने समाचार-पत्र के जरिए उस दर्द को जनता के समक्ष भी रखा। सरकारी विज्ञापनों के लिए आप सुप्रीम कोर्ट के पास गए और अपने हक के विज्ञापन शुरू करवाने का आग्रह किया। जब आपसे कर्मचारियों ने हक मांगा तो आपने उनके साथ, क्या सही व्यवहार किया।

इन पर करिएगा गौर

इन सब सवालों पर गौर करिएगा, जो जवाब आपको मिलेंगे, वे आपकी अंतरात्मा को अंदर तक झिझोड़ कर रख देंगे।
- क्या उनका हक मांगना कानूनन सही नहीं है?
- क्या उनकी आवाज दबाने के लिए उनको बर्खास्त, तबादला और सस्पेंशन की प्रकिया अपनाना क्या सही था?
- आप पत्रिका परिवार की बात करते हैं, जब कर्मचारियों के लिए वेज बोर्ड देने की सुप्रीम कोर्ट ने हरी झण्डी दे दी, तब आपने उनका हक मारने की क्यों सोची?