गुर्गों ने मजीठिया को और खींचने का पत्रिका मालिक को दिया मंत्र

जयपुर। मजीठिया मामले पर सुप्रीम कोर्ट के खरे वचनों से मीडिया मालिक खौफ में हैं, वे इससे बचने का रास्ता खोज रहे हैं, लेकिन कोई मार्ग उन्हें दिखाई नहीं दे रहा है। सूत्रों का कहना है कि पत्रिका मालिकों को उनके गुर्गों ने मजीठिया केस को थोड़ा और लम्बा खींचने का मंत्र दिया है। गुर्गों को पता है कि उनके कहने पर ही पत्रिका प्रबंधन सुप्रीम कोर्ट में कर्मचारियों के खिलाफ गया था, ऐसे में अगर इतनी आसानी से कर्मचारियों को मजीठिया का लाभ दे दिया गया, तो किसी ना किसी रूप में उन पर गाज गिरना तय है।

यह दी सलाह

ऐसे में अपनी खाल बचाने के लिए उन गुर्गों ने मालिकों को सलाह दी है कि वे सरकारी विज्ञापन का मामला सुप्रीम कोर्ट में ले जाएं और कोर्ट से आग्रह करें कि सरकार ने हमारे विज्ञापन बंद कर रखे हैं, हमारी माली हालत ठीक नहीं है, ऐसे में हम कर्मचारियों को मजीठिया का लाभ चाहकर भी नहीं दे पा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले इन तथ्यों का खयाल रखना गुर्गों

मैं उन गुर्गों को एक बात यह कहना चाहूंगा कि सहारा के वकील ने भी 23 अगस्त को कोर्ट में कहा था कि हमारा बैंक खाता सीज कर रखा है, ऐसे में हम कर्मचारियों को मजीठिया का लाभ नहीं दे पा रहे हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने उनसे तल्ख लहजे में कहा था कि क्या आपका एक ही खाता है। इसलिए गुर्गों यदि आप इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में उठाएगो तो माननीय जज आपसे यही पूछेंगे कि मजीठिया का लाभ तो 2014 से देने के आदेश थे, आपके विज्ञापन तो छह महीने से बंद हैं। साथ ही कानून में यह नहीं लिखा है कि सरकार अखबार मालिकों को विज्ञापन देने को बाध्य है। इसके अलावा आपको प्राइवेट विज्ञापन भरपूर मिल रहे हैं। इसके बाद भी यदि आपकी माली हालत ठीक नहीं है तो इतने समय से अखबार का प्रकाशन कैसे कर रहे हो, बंद क्यों नहीं कर देते। यदि यह मान भी लिया जाए कि प्रबंधन पत्रिका अखबार का प्रकाशन बंद भी कर देता है तो भी सुप्रीम कोर्ट उसकी सम्पत्तियों को बेचकर कर्मचारियों को उनका हक दिलवाएगी। यानी हर कीमत पर कर्मचारियों को उनका हक देना ही पड़ेगा। अब देखना यह है कि पत्रिका प्रबंधन इन गुर्गों की सलाह पर कितना ध्यान देता है।