मजीठिया देने की आहट से चकराने लगा सिर, गुलाब कोठारी करा रहे चम्पी

जयपुर। सर मेरा चकराए और दिल डूबा जाए...मन भी घबराए...कहीं कर्मचारी मजीठिया ना ले जाएं...क्या है अब उपाय...क्या है अब उपाय...। तेल मालिश ...तेल मालिश। जी हां, मजीठिया मामले में जैसे-जैसे सुप्रीम कोर्ट मीडिया मालिकों पर अपना शिकंजा कस रहा है। वैसे ही सभी मीडिया मालिकों के सिर चकराने लग गए हैं। कुछ ऐसा ही हाल हो रहा है राजस्थान पत्रिका के मालिक माननीय गुलाब कोठारी का। इन्हें अब लगने लग गया है कि इनकी चालें अब ज्यादा दिन तक सुप्रीम कोर्ट में नहीं चलेंगी और कर्मचारियों को मजीठिया का लाभ देना ही पड़ेगा। इसलिए एक साथ करोड़ों रूपए जाने की सोच-सोचकर इनका सिर चकराने लग गया है। ये सोच रहे हैं कि जिस पैसे को हमने बड़ी मेहनत यानी कर्मचारियों का हक मार-मारकर कई सालों में जोड़ा था, उस पैसे को एक ही झटके में कर्मचारी ले जाएंगे। इसलिए इनकी पैरों तले जमीन तो खिसकी है ही, सिर भी घूमने लग गया है।

चम्पी करा दर्द भगाने की जुगत

पहले घुटनों के जवाब देने और अब सिर चकराने से परेशान माननीय गुलाब कोठारी ने सभी चपरासियों की ड्यूटी अपने बंगले पर लगा दी है। ये सभी लोग बारी-बारी से सुबह और शाम इनकी चम्पी करते हैं। सूत्रों का कहना है कि झोटवाड़ा निवासी एक वैद्यजी की देखरेख में चपरासी गुलाब कोठारी की सिर से लेकर पैर पर चम्पी करते हैं। वैद्यजी केरल की पद्वति के अनुसार गुलाब कोठारी का दर्द दूर करने में लगे हुए हैं। वैद्यजी की देखरेख में चपरासी कोट्टायम नामक चूर्ण से सुबह गुलाब कोठारी के पूरे शरीर की मालिश करते हैं। यह चूर्ण शरीर के ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करने वाला बताया जा रहा है, इससे सारी बीमारियां दूर हो जाती हैं। ज्यादातर मालिश घुटनों और सिर के आस-पास की होती है, क्योंकि, दोनों ही जगह दर्द इतना है कि चैन ही नहीं मिलता है।

मिट्टी दे रही दर्द से राहत

सुबह चूर्ण थैरेपी लेने वाले गुलाब कोठारी शाम को मिट्टी का सेक करते हैं। इसके लिए मिट्टी को सूती कपड़े में बांधकर उसके कई गोले बना रखे हैं। उन गोलों को तवे पर गर्म कर उनसे शरीर पर सेक किया जाता है। यानी दर्द को दूर करने के लिए गुलाब कोठारी पूरे जतन कर रहे हैं। हम उन्हें सिर्फ यही कहना चाहेंगे कि गुलाब कोठारी हो सकता है कि इस तरह आपके शरीर का दर्द भले ही कम हो जाए, लेकिन मन का दर्द कम नहीं होगा। क्योंकि, मजीठिया तो हर हाल में कर्मचारी लेकर ही रहेगा। दूसरी बात आप मिट्टी का सेक कर रहे हैं। जीवन का अंतिम सच भी यही है कि हर इनसान को पांच तत्वों में ही मिलना होता है, उस वक्त धन-दौलत किसी काम नहीं आती है। इसलिए उसके लिए इतना अहंकार क्यों, उसके लिए अपने कर्मचारियों का भरोसा खोया क्यों, उसके लिए सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे हो क्यों, कभी खाली समय हो तो सोचना अवश्य। अभी जो धन-दौलत आपको सेहतमंद नहीं कर पा रही है, वहीं एक धूल का गोला आपको दर्द से राहत दे रहा है। इसलिए जीवन का असली आनंद छीनने में नहीं, देने में है। पानी से भरे बादल काले दिखते हैं, लेकिन पानी बरसाते ही धवल हो जाते हैं।