पत्रिका केसरगढ़ मुख्यालय में सिद्धार्थ कोठारी ले रहे मजीठिया मीटिंग, कल भी होगी मीटिंग

जयपुर। मजीठिया मामले पर अब मीडिया मालिकों की दंडबैठक शुरू हो गई है। मंगलवार को दैनिक भास्कर के मालिक सुधीर अग्रवाल ने राजस्थान के सभी यूनिट हैड और एचआर हैड की मीटिंग ली थी और बुधवार को पत्रिका के केसरगढ़ मुख्यालय में ऐसा ही हो रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस मीटिंग को सिद्धार्थ कोठारी ले रहे हैं। इसमें एचपी तिवाड़ी, राकेश भण्डारी सहित कई उच्चाधिकारी और मैनेजर शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि ऑफिस में किसी को भी इस मीटिंग के बारे में नहीं बताया गया है।

बिजनेस के फेर में मजीठिया मीटिंग

सभी को यह कहा जा रहा है कि नवरात्रा और दीपावली आ रहे हैं, इसलिए बिजनेस पर बात की जा रही है। लेकिन, सूत्रों का कहना है कि इसके पीछे राज दूसरा है। असल में यह मीटिंग मजीठिया कर्मचारियों को लेकर है। सुप्रीम कोर्ट में हुई पिछली सुनवाई के बाद मीडिया मालिकों का काउंट डाउन शुरू हो गया है। सभी मीडिया मालिका गुपचुप तरीके से मीटिंग कर, इससे निपटने के तरीकों पर विचार कर रहे हैं। इस समय सभी मीडिया मालिकों का जोर इस बात पर है कि जो कर्मचारी केस में नहीं गए हैं, उनको कैसे खुश रखा जाए। वे केस गए कर्मचारियों को मजीठिया का पैसा देकर इस मामले से पीछा छुड़ाना चाह रहे हैं।

मैनेजरों ने बताई पीड़ा

सूत्रों का कहना है कि सिद्धार्थ कोठारी ने सभी अधिकारियों से मजीठिया मामले पर बातचीत की। ज्यादातर ने यह कहा कि हमने कर्मचारियों को भरोसा दे रखा है कि अगर मजीठिया मिला तो सभी को मिलेगा, वरना नहीं मिलेगा। ऐसे में उन्होंने कहा कि यदि प्रबंधन केस गए कर्मचारियों को मजीठिया का लाभ देता है तो अभी तक केस नहीं गए कर्मचारियों में से कई विद्रोह कर सकते हैं। ऐसे में सिद्वार्थ कोठारी ने सभी से कहा कि किसी भी तरह आप कर्मचारियों को मनाकर रखो। गुरुवार को भी इन सभी की इसी मुद्दे पर फाइनल बात होगी। उसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।

इसलिए बनाया हिसाब का मन

वैसे भी 4 अक्टूबर की सुनवाई में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ का नम्बर है, इन दोनों ही जगह पत्रिका ऑफिस हैं। इसलिए पत्रिका प्रबंधन को लग गया कि 4 अक्टूबर को सुनवाई के बाद माननीय सुप्रीम कोर्ट का फैसला हर हाल में मानना ही होगा। उन्हें और ज्यादा दिन तक अंधरे में नहीं रख सकते हैं। इसलिए ये मीटिंग मजीठिया देने की दिशा में ही की जा रही हैं। पत्रिका प्रबंधन ने भी देख लिया कि दो साल से ज्यादा का समय हो गया है, अभी तक केस करने वाले कर्मचारियों में से एक भी वापस नहीं आया। इसलिए उन्होंने अब केस गए कर्मचारियों का हिसाब करने का मन बना लिया है।