मजीठिया मामले पर थू-थू से गुलाब कोठारी आहत, बेहतर सर्विस रिकॉर्ड वाले कर्मचारियों से जल्द समझौता

जयपुर। राजस्थान पत्रिका के केसरगढ़ मुख्यालय में अभी दो-तीन दिन से कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। इस दौरान सभी लोग अपने-अपने तरीकों से इसकी व्याख्या कर रहे थे। कोई कह रहा था कि जो कर्मचारी केस में नहीं गए हैं, उनका पारिवारिक बैक ग्राउंड और उनका अब तक का कार्यकाल देखा जा रहा है। अगर कहीं कोई पोल मिला तो उस पर दबाव बनाकर पत्रिका से इस्तीफा लेकर नई कम्पनी में ज्वॉइनिंग दे दी जाएगी। कोई कह रहा था कि मजीठिया कर्मचारियों ने श्रम कोर्ट में स्टेटमेंट ऑफ क्लेम दायर किया है, इसलिए रिकॉर्ड मिलाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। यानी अफवाहों का बाजार गर्म था। लेकिन, 19 अगस्त को माननीय गुलाब कोठारी ने बंगले पर अधिकारियों की मजीठिया मामले पर बैठक ली। बैठक में एच.पी. तिवाड़ी समेत कई बड़े अधिकारी थे।

मजीठिया मामले पर मंथन

विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि मजीठिया मामले पर हो रही थू-थू के मुद्दे पर बैठक में मंथन किया गया। गुलाब कोठारी इस चक्रव्यूह से बाहर आना चाहते हैं। वे चाह रहे हैं कि किस तरह से कर्मचारियों को मनाया जाए। सूत्रों के मुताबिक वे मजीठिया कर्मचारियों से समझौता तो करना चाहते हैं, लेकिन कुछ ही कर्मचारियों से। वे मजीठिया केस में गए उन कर्मचारियों से बातचीत कर बीच का रास्ता निकालने की सोच रहे हैं, जिनका अभी तक का सर्विस रिकॉर्ड तो बेहतर रहा है, लेकिन, मजीठिया केस में चले गए। वे ऐसे कर्मचारियों से बात करेंगे और मजीठिया केस में जाने के कारणों पर उनसे चर्चा करेंगे।

इसलिए खंगाले जा रहे सर्विस रिकॉर्ड

केसरगढ़ में इसलिए मजीठिया कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। अभी तक पत्रिका में बेहतर रिकॉर्ड रखने वाले मजीठिया कर्मचारियों की लिस्ट बनाई जा रही है। फिर उन्हें बातचीत के लिए बुलाया जाएगा। पहले सम्बंधित अधिकारी कर्मचारी से बात करेंगे। यदि बात नहीं बनती है तो खुद गुलाब कोठारी उनसे बात करेंगे और उनकी परेशानियां समझेंगे। यानी अब गुलाब कोठारी खुद मजीठिया मामले को देख रहे हैं।

ये हैं कारण

विज्ञापनों पर सरकार की खिंचाई करने के दौरान पत्रकारों ने भी सोशल मीडिया पर उनकी खूब खिंचाई की थी। इसलिए उन्हें भी कई जगहों से इस बारे में सुनने को मिला था। इसलिए अब वे सोच रहे हैं कि पहले घर की कलह मिटाई जाए। दूसरा कारण यह भी बताया जा रहा है कि पत्रिका में कर्मचारियों का भी टोटा है। अच्छे कर्मचारी मिल नहीं रहे हैं, जो मिल रहे हैं, वे सैलेरी ज्यादा मांग रहे हैं। कर्मचारियों का टोटा होने से अखबार में कंटेंट भी स्तरीय नहीं जा रहा है। ऐसे में इन्होंने सोचा कि क्यों ना अपने बेहतर कर्मचारियों को ही मनाया जाए, जिससे कम सैलेरी में अच्छा कार्य होगा।