बिना केस वाले कर्मचारियों को मजीठिया नहीं देने की पत्रिका ने निकाली यह राह

जयपुर। सुप्रीम कोर्ट के 23 अगस्त के रूख को देखकर और अपना एक भी दांव-पेच चलता नहीं देख अखबार मालिकान पगला गए हैं। ये ऐसे-ऐसे निर्णय और योजनाएं लागू कर रहे हैं, जिससे इनका खुद ही नुकसान हो रहा है। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने इस सुनवाई में कहा था कि ठेका कर्मचारी भी मजीठिया वेज बोर्ड का हकदार है। उसके बाद से तो मानो अखबार मालिकानों को सांप सूंघ गया हो। इन्हें इसकी उम्मीद कतई नहीं थी, इसलिए ही इन्होंने नई कम्पनी बनाकर अधिकतर कर्मचारियों को उसमें डालकर ठेका कर्मचारी बना दिया, लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के रूख ने अखबार मालिकानों को दिन में तारे दिखा दिए हैं। इसलिए अखबार मालिकान अब नया शिगूफा लाए हैं। ताजा उदाहरण है, राजस्थान पत्रिका का।

स्काई मीडिया में डालेंगे कर्मचारियों को

खबर है कि ये अपनी फोर्ट फोलियो कम्पनी को बंद कर रहे हैं और उसके कर्मचारियों को स्काई मीडिया नामक डिजीटल कम्पनी में डाल रहे हैं। अखबार मालिकानों को इसका फायदा यह है कि सुप्रीम कोर्ट के ठेका कर्मचारियों को भी वेज बोर्ड देने की बात कहने पर भी इन्हें मजीठिया का लाभ नहीं दिया जाएगा। अब जानिए कि आखिर अखबार मालिकान ऐसा कैसे कर सकते हैं। अखबार मालिकान श्रमायुक्त और सुप्रीम कोर्ट से कहेंगे कि हमारे यहां ठेका कर्मचारी कोई भी नहीं है। ये कर्मचारी स्काई मीडिया के हैं और इनके जो पद हैं, उनका वेज बोर्ड की अनुशंसा में जिक्र नहीं है। ऐसे में इन पर वेज बोर्ड का नियम लागू नहीं होता है। क्योंकि, राजस्थान पत्रिका प्रबंधन स्काई मीडिया में इनको जो पद देगा, वे कंटेन्ट प्लानर, कंटेन्ट एनालिसिस्ट जैसे होंगे, जिनका वेज बोर्ड की अनुशंसा में जिक्र ही नहीं है। ऐसे में राजस्थान पत्रिका प्रबंधन इन कर्मचारियों को वेज बोर्ड के लाभ से वंचित कर देगा।

केस नहीं गए कर्मचारियों के साथ होगा यह

अब रही बात राजस्थान पत्रिका के परमानेंट कर्मचारियों की, जो अभी तक केस में नहीं गए हैं। खबर है कि पत्रिका प्रबंधन अपने सभी कर्मचारियों से ज्वॉइनिंग डेट, ग्रेड लगने की डेट, पारिवारिक बैक ग्राउण्ड सहित तमाम जानकारियां ले रहा है। सूत्रों का कहना है कि पत्रिका प्रबंधन इनको भी स्काई मीडिया में डालेगा। तब इनके पदनाम भी कंटेन्ट प्लानर, कंटेन्ट एनालिसिस्ट हो जाएंगे और इनको भी वेज बोर्ड का लाभ नहीं दिया जाएगा। इसके बाद केस गए कर्मचारियों को उनका हक का पैसा देकर राजस्थान पत्रिका उनसे अपना पीछा छुड़ा लेगी।

साथियों के लिए यह है सलाह

मीडिया होल्स के पास राजस्थान पत्रिका के कई सीनियर रिपोर्टर और डेस्ककर्मियों के फोन आ रहे हैं, वे बता रहे हैं कि हमें स्काई मीडिया में डालने की पूरी प्रक्रिया की जा रही है। अब हम केस करना चाहते हैं, इसके लिए क्या करें। उन लोगों के लिए मीडिया होल्स की सलाह है कि सबसे पहले श्रमायुक्त के यहां मजीठिया नहीं देने और परेशान करने की शिकायत करें। ऐसा करने से राजस्थान पत्रिका प्रबंधन आपकी कम्पनी चेंज नहीं कर पाएगा। इसके बाद माननीय सुप्रीम कोर्ट में श्रमायुक्त अपनी रिपोर्ट में इसका जिक्र भी करेगा और आपको मजीठिया का लाभ भी दिलाएगा।