आठ को मजीठिया साथियों के ठाठ, मीडिया मालिकों को जारी हो सकते हैं अवमानना नोटिस

नई दिल्ली। देश के सबसे चर्चित मजीठिया मामले की सुनवाई आठ नवम्बर को सुप्रीम कोर्ट में है। दोपहर दो बजे से होने वाली सुनवाई केरल, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तेलगांना और तमिलनाडु राज्यों की स्टेट्स रिपोर्ट से शुरू होगी। पिछली सुनवाई में माननीय सुप्रीम कोर्ट में इन राज्यों के श्रमायुक्तों को मजीठिया वेज बोर्ड के सम्बंध में स्टेट्स रिपोर्ट मांगी थी। पिछली दो सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने 20 जे पर मौखिक टिप्पणी करते हुए मीडिया मालिकों को जमकर लताड़ लगाई थी। साथ ही पिछली सुनवाई में सीनियर वकील कोलिन गोंसाल्विस ने माननीय सुप्रीम कोर्ट से 20 जे की धारा पर कोई लिखित आदेश देने का आग्रह किया था।
इसलिए यह संभावना है कि इस बार सुप्रीम कोर्ट 20 जे की धारा के सम्बंध में लिखित आदेश देकर मीडिया मालिकों को झटका दे सकता है। इसी के साथ मीडिया मालिकों का छद्म रूप भी खत्म हो जाएगा, इसी 20 जे की आड़ में अभी तक मीडिया मालिक मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ देने से बचते आ रहे हैं।
इस बार सुनवाई में अगले पांच राज्यों में राजस्थान का नम्बर भी आ सकता है। क्योंकि, सबसे ज्यादा मजीठिया की शिकायतें भी राजस्थान से हैं और अब जो राज्य बचे हैं, उन बड़े राज्यों में राजस्थान भी आता है। इसलिए राजस्थान के हजारों मजीठिया साथी, थोड़ी राहत महसूस कर सकते हैं। हालांकि, 20 जे पर लिखित आदेश आते ही मीडिया मालिक खुद ही सरेण्डर कर देंगे। क्योंकि, उनके पास बचने का कोई और रास्ता है ही नहीं।

कोलिन उठाएंगे अवमानना का मुद्दा

सूत्रों का कहना है कि सीनियर वकील कोलिन गोंसाल्विस इस बार सुनवाई में मीडिया मालिकों को अवमानना नोटिस जारी करने का मुद्दा भी उठाएंगे। इसलिए संभावना है कि इस सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट मौखिक रूप से मीडिया मालिकों को अवमानना का भय दिखा सकता है। हालांकि, इस सुनवाई में लिखित में 20 जे पर आदेश आते ही, एक तरह से मीडिया मालिक अवमानना के दोषी तो हो ही गए। इससे अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट मीडिया मालिकों के खिलाफ अवमानना के नोटिस भी जारी कर सकता है।

6 नवम्बर को दिल्ली में मालिकों का डेरा

इसी बात से सारे मीडिया मालिक डरे हुए हैं। सभी मीडिया मालिक आठ नवम्बर की सुनवाई से पहले 6 नवम्बर को दिल्ली में एकत्रित होंगे और अगले कदम पर मंथन करेंगे। मीडिया मालिकों के इन्हीं खास सूत्रों का कहना है कि इनके वकीलों ने इन्हें साफ मना कर दिया है कि अब हम केस को ज्यादा नहीं खींच सकते हैं। इसलिए केस करने वाले कर्मचारियों को उनका हक दे दो, वरना अवमानना से उन्हें बचा नहीं पाएंगे। इसलिए मीडिया मालिकों के गुर्गे अब तक केस नहीं करने वाले कर्मचारियों को बरगला रहे हैं कि केस श्रम कोर्ट में आ गया है, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं करेगा, इसलिए केस मत करो। वह ऐसा इसलिए कह रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने लगातार अपनी सुनवाई में साफ किया है कि जो शिकायत करेगा, मजीठिया का लाभ उसी को मिलेगा। ऐसे में ये गुर्गे चाह रहे हैं कि नए कर्मचारी केस में ना जुड़े। क्योंकि, यदि सभी कर्मचारियों को एरियर का लाभ देना पड़ा तो प्रत्येक मीडिया मालिक पर कम से कम 500 करोड़ का फटका लगेगा।