नेहरु उद्यान में मजीठिया साथियों की बैठक, पत्रिका मालिकों से डटकर मुकाबला करने का लिया संकल्प

जयपुर। सुप्रीम कोर्ट के अभी हाल ही में आए आदेश के बाद और अखबार मालिकों की ओर से टाइम्स ऑफ इण्डिया की याचिका का हवाला देकर फैलाई गई अफवाह से कई मजीठिया साथी निराश हो गए थे। पूरे देशभर के मजीठिया साथी अपने-अपने तरीके से इस खबर की टोह लेने लग गए। राजस्थान में भी ऐसा ही हुआ, मजीठिया साथी बैचेनी से भर गए। वे पूछने लगे, अब क्या होगा। हमारा तो कॅरियर भी गया और मजीठिया का लाभ भी नहीं मिलेगा। उनकी इन्हीं शंकाओं के निवारण के लिए टोंक रोड स्थित नेहरु बालोद्यान में मजीठिया साथियों की बैठक रखी गई थी। मजीठिया इम्प्लीमेंट संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित इस बैठक में दर्जनों मजीठिया साथी आए। बैठक में सभी ने अपनी शंकाओं को रखा। इस पर मजीठिया इम्प्लीमेंट संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने उनकी शंकाओं का निवारण किया। मजीठिया साथियों को भरोसा दिलाया कि हम सही रास्ते पर हैं, मीडिया मालिक डरे हुए हैं, इसलिए ऐसी अफवाहें फैला रहे हैं। आप धैर्य रखें, जीत अपनी ही होगी। इसके बाद सभी साथियों ने मीडिया मालिकों से डटकर मुकाबला करने का संकल्प लिया। इस बैठक में अधिकांश राजस्थान पत्रिका के कर्मचारी थे।

यह है बैठक का सारांश

मित्रों, सुप्रीम कोर्ट के 4 अक्टूबर के फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि हम यानी पत्रिका के साथी सही रणनीति पर चल रहे थे और चल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट कुछ बिन्दुओं ( जिसमें 20-जे भी शामिल है) को तय करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट यह तय नहीं कर सकता कि फलां कर्मचारी का कितना पैसा बनता है और फलां का कितना। एक-दो नहीं, कर्मचारियों की संख्या हजारों में है। अमाउंट तो किसी कोर्ट में ही तय होना था , इसलिए हमने लेबर कोर्ट में मामलों का रेफरेंस होते ही वहां कार्यवाही शुरू कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कह दिया है कि अमाउंट पर विवाद होने पर 17-2 (यानी लेबर कोर्ट में रेफरेंस भेजना) की कार्यवाही की जाए। साथ ही लेबर कोर्ट को भी मामले शीघ्र निपटाने का निर्देश दिया है। हमारे वकील कॉलिन का प्रयास है कि 20-जे जैसे मुद्दे सुप्रीम कोर्ट में तय हो जाएं और सुप्रीम कोर्ट ही निगरानी करते हुए लेबर कोर्ट के लिए समयसीमा तय कर मामले निपटाने को कहे।

सिर्फ मांगने वालों को ही मिलेगा मजीठिया

सुप्रीम कोर्ट के हालिया दोनों अंतरिम आदेशों से स्पष्ट हो चुका है कि मजीठिया वेतनमान पाने के लिए लेबर कमिश्नर के यहां आवेदन करना ही होगा। सुप्रीम कोर्ट अब सिर्फ लेबर कमिश्नर और लेबर कोर्ट में हो रही कार्यवाही को ही मोनिटर करेगा। इसीलिए अब मजीठिया वेतनमान की इच्छा रखने वाले सभी साथियों के पास शिकायत करने का ही विकल्प बचा है। या तो संस्थान के पास खून-,पसीने का हक रूपी बीस लाख रुपए छोड़ो या फिर शिकायत करो।