मजीठिया: ठेका कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट का तोहफा

मीडिया होल्स डॉट कॉम ने भी पहले ही इस सम्बन्ध में दी थी खबर

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के कल के रुख और आदेश से अनुबंध पर रखे गए हजारों- लाखों कर्मचारियों को मालिकों के शैतानी चंगुल से बचाने में मदद किलेगी। खासकर वैसे कम्रचारी जिन्‍हें नाममात्र के वेतन पर रख कर ये लोग मजीठिया वेज र्बोड से अधिक वेतन देने का दम भर रहे हैं।
सबसे पहले तो इस संदर्भ में पीटआई के साथियों को बहुत अधिक फायदा होने वाला है। यहां प्रबंधन और फेडरेशन दोनों कह रहे है कि मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू कर दिया गया है। लेकिन हकीकत ये है कि इससे ठेके पर रखे गए साथियों को एक पैसे का भी फायदा नहीं हुआ है। उल्‍टे फेडरेशन ने उनपसे इसके लिए चंदे के रूप में लाखों वसूल कर लिए। यहां दूसरे कर्मचारियों को एरियर की दो किस्‍तों को भी भुगतान नहीं हुआ है।
इस संदर्भ में सबसे महत्‍वपूर्ण और चौंकाने वाली बात है कि प्रबंधन किस्‍तों और ठेके पर रखे गए साथियों को मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ न देने के पीछे फेडरेशन और प्रबंधन के बीच हुए समझौते को सबसे बड़ा बाधा बताया जा रहा है। दोनों के बीच समझौता होने की बात तो आधिकारिक रूप से स्‍वीकार की गई है लेकिन इस समझौते की शर्तो पर न तो प्रबंधन केुछ बोल रहा है और न ही फेडरेशन।
समझा जाता है कि 26 तारीख से फेडरेशन का पटना मे होने वाले अधिवेशन में इस पर गर्मगर्म चर्चा हो सकती है। और अब जब सुप्रीम कोर्ट ने ठेके पर रखे कर्मचारियों को भी सभी सुविधा और लाभ दिलाने के आदेश दे दिए हैं तो फेडरेशन पर प्रबंधन पर इन कर्मचारियों का हक दिलाने का जोर बढ़ेगा। अधिवेशन में मांग की जा सकती ळै कि अब फेडरेशन को प्रबंधन के खिलाफ सुप्रीम कोटर् में कैविएट दायर करना चाहिए।
नए सीईओ के आने के बाद पटना में होने वाला यह अधिवेशन इस लिए भी महत्‍वपूर्ण हेा गया है। महाराज किसन राजदान(एमकेआर) की सत्‍ता समाप्ति के बाद फेडरेशन के कथित स्‍वयंभू नेता श्‍याम मोहन (एमएस) यादव की फजीहत तय है। यह किसी से किसी से छिपा नहीं है कि एमएस और राजदान दोनों के बीच तगड़ी मिलीभगत थी। इसी कारण मजीठिया पर फेडरेशन ने प्रबंधन से समझौता कर अनुबंध के साथियों के साथ यह सौतेला व्‍यवहार किया।
वैसे भी पटना अधिवेशन कई तरह के विरोधाभासी विवादों में फंस गया है। वहां के कई साथी वहां के फेडरेशन नेताओं पर कई तरह के आरोप लगा रहे हैं। स्‍मारिका के नाम पर चंदा वसूलने और मुख्‍यमंत्री को अंधेरे में रखने का भी आरोप लगाया जा रहा है।

साभार: मजीठिया मंच के फेसबुक बॉल से