लीगल इशू पर जवाब के लिए पत्रिका के पास आठ तक का समय

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मजीठिया मामले की जानकारी तो हर किसी को है ही, लेकिन इस केस के इतर होने वाली घटनाओं को हर कोई जान नहीं पाता है। एक ऐसा ही वाकया मीडिया होल्स की नजर में आया है, जिसे आप सभी भी जानिए। इस बार सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने लीगल इशू तय करने के लिए मीडिया मालिकों को समय दे दिया। लेकिन, ठीक इससे पहले वाली तारीख पर लीगल इशू तय करने और उस पर मीडिया मालिकों को जवाब देने को कहा था।

जज साहब ने समझा दिया वकील को

इसी के तहत इस सुनवाई में राजस्थान पत्रिका की ओर से मजीठिया मामले की पैरवी कर रहे वकील ने माननीय सुप्रीम कोर्ट को कुछ कागजात पेश किए। ये वही कागजात हैं, जिन पर राजस्थान पत्रिका प्रबंधन ने कर्मचारियों से जबरदस्ती हस्ताक्षर करवाए थे और अब सुप्रीम कोर्ट में उन कागजों को 20-जे की अंडरटेकिंग बता रही है। ये कागजात देख माननीय जज साहब ने वकील को तल्ख लहजे में ये कागजात ले जाने को कहा। माननीय जज साहब ने वकील से कहा कि मैंने लीगल इशू पर जवाब देने को कहा था, ये कागज पेश करने को नहीं कहा था। इसलिए लीगल इशू पर जल्द जवाब दो, नहीं तो अवमानना का केस लग जाएगा।

बाकी हैं 4 दिन

इस पर वकील ने क्षमा मांगते हुए लीगल इशू पर जवाब देने के लिए समय मांगा। इस पर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान पत्रिका के वकील को 8 दिसम्बर को लीगल इशू पर जवाब देने को कहा है। अब वकील और पत्रिका प्रबंधन पशोपेश में हैं कि क्या जवाब दें।

प्रबंधन का वही पुराना राग

हालांकि, सूत्रों का कहना है कि मजीठिया केस करने पर इन्होंने जिन लोगों के तबादला और टर्मिनेट किया है, उनमें से कुछ के जवाब दे दिए हैं। जवाब क्या दिया है, यह तो अभी ठीक से मालूम नहीं चल पाया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि जवाब में कहा गया है कि इनका तबादला और टर्मिनेशन की कार्रवाई कम्पनी के तय नियमों के मुताबिक और कानून के दायरे में की गई है। अब देखने वाली बात यह है कि इनके वकील इस जवाब से माननीय सुप्रीम कोर्ट को संतुष्ट कर पाते हैं या नहीं।