पत्रिका को कलमवीर नहीं, चाहिए वसूली भाई

जयपुर। राजस्थान पत्रिका के मालिकों को भले ही देर से ही सही यह बात समझ में अच्छे से आ गई है कि पत्रकार ही अखबार की मुख्य धुरी होता है। अगर पत्रकार चाहे तो वह सर्कुलेशन और विज्ञापन दोनों की ग्रोथ भी चुटकियों में बढ़ा सकता है। पत्रकारों के इसी मल्टी टैलेंट को पत्रिका के मालिक समझ गए हैं, इसलिए उन्होंने सम्पादकीय, सर्कुलेशन और मार्केटिंग विभाग को आपस में जोड़ दिया है। या यूं कहें कि तीनों को एक ही क्लस्टर में डाल दिया है।

...और मालिकों के दिमाग में फिट हो गई बात

सूत्रों का कहना है कि पत्रिका के मालिकों ने सर्कुलेशन बढ़ाने की खूब कोशिश कर ली। हॉकरों को भी बड़े-बड़े गिफ्ट दिए और मोटी सैलेरी वाले अधिकारी भी खूब रखे। लेकिन, सर्कुलेशन उनकी उम्मीद जितना नहीं बढ़ पाया। यही हालात विज्ञापनों के होने लग गए। विज्ञापनदाता पहले भास्कर में विज्ञापन देने लगे। पत्रिका से विज्ञापनदाताओं का मोह भंग होने लगा। पत्रिका ने कई मोटी सैलेरी वाले लोगों को विज्ञापन बढ़ाने के लिए बिठाया। पत्रिका का कलेवर चेंज करवाया, लेकिन फिर भी स्थिति ढाक के तीन पांत वाली रही। वहीं इनसे इतर जब मालिक सम्पादकीय विभाग को कोई कार्य बताते, तो वह पलक झपकते ही हो जाता। इस कार्य के लिए पत्रिका को कोई भुगतान भी नहीं करना पड़ता। आखिरकार मालिकों के दिमाग में यह बात अच्छे से बैठ गई कि पत्रकार भी उसकी हर प्रॉब्लम का हल है। इसलिए उसने इन तीनों विभागों का क्लस्टर बना दिया। साथ ही सर्कुलेशन और विज्ञापन दोनों विभागों से कई साथियों को भी हटा दिया।

फिर अपना टैलेंट दिखाएंगे पत्रकार

सूत्रों का कहना है कि सर्कुलेशन, मार्केटिंग और सम्पादकीय विभाग के साथी अब मिलकर कार्य करेंगे। जहां पर सर्कुलेशन और मार्केटिंग विभाग के साथी अपने हाथ खड़े कर देंगे, वहां से सम्पादकीय विभाग के साथी उस कार्य को पूरा करेंगे। मसलन-अथक प्रयासों के बाद भी जब मार्केटिंग विभाग के व्यक्ति किसी खास पार्टी का विज्ञापन नहीं ला सकेंगे तो फिर सम्पादकीय विभाग के साथी अपनी स्टाइल में उससे विज्ञापन लाने का कार्य करेंगे। यह तो आप भलीभांति जानते ही है कि पत्रकार किसी से भी कुछ भी ला सकते हैं।

हाइपर सिटी के पीछे एक कारण यह भी

यह भी एक कारण है कि पत्रिका ने हाइपर सिटी के नाम पर शहर में जगह-जगह ऑफिस खोले हैं और वहां पर वह तीनों विभागों के साथियों को बिठाएगी, जिससे आपस में कॉर्डिनेशन बेहतर हो और आउटपुट अच्छा हो। यानी पत्रिका को अब कलमवीर नहीं वसूली भाई चाहिए, जिससे उनकी आमदनी में चौतरफा बढ़ोतरी हो। सूत्रों का कहना है कि अब वसूली भाई टाइप के पत्रकारों के अच्छे दिन आ गए हैं। जो जितना वसूली करेगा, उसको उतना ही प्रमोशन और सैलेरी में बढ़ोतरी मिलेगी।