कर्मचारियों को फ्री में घूमने भेजकर 40 लाख रूपए तक बचा रहा पत्रिका प्रबंधन

जयपुर। मजीठिया वेज बोर्ड से बचने के लिए मीडिया मालिक क्या-क्या जतन कर चुके हैं और कर रहे हैं। ये तो आप सभी अच्छे से जानते ही हो। अब जब काफी देर के बाद सुप्रीम कोर्ट का डण्डा इन पर धीरे-धीरे रंग जमा रहा है तो इनको समझ में आ गया है कि मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ तो कर्मचारियों को देना ही पड़ेगा। इसके बाद भी मीडिया मालिक सभी कर्मचारियों को वेज बोर्ड का लाभ देने के मूड में नहीं हैं। वे सिर्फ केस धारक कर्मचारियों को ही मजीठिया अवॉर्ड का लाभ देना चाहते हैं। इसलिए दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका, अमर उजाला, दैनिक हिन्दुस्तान समेत अखबार मालिक कोई ना कोई जुगत लगा रहे हैं। केस नहीं करने वाले कर्मचारियों को मजीठिया नहीं देना पड़े, इसके लिए राजस्थान पत्रिका ने जो रास्ता निकाला है, वह हींग लगे ना फिटकरी और रंग भी चोखो आए जैसा है।

यह निकाला है पत्रिका ने रास्ता

यह तो आप सभी जानते ही हैं कि टीवी चैनल और बड़ी-बड़ी कम्पनी वाले आए दिन कोई ना कोई कार्यक्रम करते रहते हैं। इनमें मीडिया प्रतिनिधियों को भी कवरेज के लिए बुलाया जाता है। इन मीडिया प्रतिनिधियों का आने-जाने, रहने-खाने और घूमने का पूरा किराया भी अमुक टीवी चैनल और कम्पनियां उठाती हैं। राजस्थान पत्रिका को भी इनसे बुलावा आता है। अभी तक राजस्थान पत्रिका प्रबंधन की ओर से इन कार्यक्रमों में सम्पादक स्तर के लोगों या चमचों को भेजा जाता था। लेकिन, अब इन कार्यक्रमों में बारी-बारी से उन सभी कर्मचारियों को भेजा जा रहा है, जिन्होंने अभी तक केस नहीं किया है। इसके पीछे पत्रिका प्रबंधन की सोच यह है कि कर्मचारी को घूमने भेजने में पैसा भी खर्च नहीं हो रहा और कर्मचारी घूमकर खुश हो जाएगा। उसे लगेगा कि कम्पनी उसका कितना खयाल रखती है और अधिकारियों की ओर से उसे उसके सुनहरे कॅरियर का सब्जबाग दिखाया जाएगा। जिससे वह फूलकर कुप्पा हो जाएगा। वह चाहकर भी मजीठिया अवॉर्ड की मांग पत्रिका प्रबंधन से कभी नहीं करेगा।

जैसा कद और पद, वैसा ही घूमने का मौका

मीडिया होल्स के विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि पत्रिका प्रबंधन इन दिनों केस नहीं करने वाले कर्मचारियों पर भरपूर मेहरबान है। इनमें सम्पादक स्तर से लेकर निचले स्तर के पत्रकार साथी भी शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि पत्रिका इस समय उन सभी कर्मचारियों और कथित अधिकारियों को घूमने भेज रही है, जिनकी अभी तक पत्रिका प्रबंधन कोई खैर-खबर नहीं लेता था। इन कथित अधिकारियों को कतर, मलेशिया, सिंगापुर, गोवा जैसी जगह घूमने भेज रही है तो छोटे कद के कर्मचारियों को दिल्ली, मुम्बई, उत्तराखण्ड जैसी जगहों पर। खास बात यह है कि अमुक टीवी चैनल वाले एक मीडिया हाउस से सिर्फ एक प्रतिनिधि को बुलाते हैं, उनका परिवार इसमें शामिल नहीं होता है। ऐसे में राजस्थान पत्रिका प्रबंधन भी बारी-बारी से एक अधिकारी और कर्मचारी को ही भेज रहा है।

इन अक्ल के अंधों को कौन दिखाए रास्ता

ये कथित अधिकारी और कर्मचारी अकेले-अकेले घूमकर खुश हो रहे हैं और फेसबुक पर फीकी हंसी वाले फोटो डालकर परिवार साथ ना होने के गम को छुपाने का प्रयास कर रहे हैं। अब इन कथित अधिकारियों और कर्मचारियों से कोई यह पूछे कि यदि पत्रिका प्रबंधन आपकी इतनी औकात समझता तो मजीठिया से पहले आपको कहीं घूमने क्यों नहीं भेजा। यदि अभी भी भेज रहा है तो परिवार के साथ क्यों नहीं भेज रहा। लेकिन, जब ये लोग मजीठिया केस करने की हिम्मत ही नहीं रखते हैं तो फिर इनकी क्या मजाल, ये यह सवाल पत्रिका प्रबंधन से पूछ लें। इन कथित अधिकारियों की भी औकात इतनी नहीं है कि वे अपने खर्चे पर अपने साथ परिवार को ले जा सकें। इसलिए ये अकेले ही घूमकर खुश हो रहे हैं। इन्हें पता नहीं कि फ्री में घूमने भेजकर राजस्थान पत्रिका प्रबंधन प्रति कर्मचारी इनके मजीठिया पेटे के 30-40 लाख रूपए बचा रहा है। अब हम तो इनको समझा सकते हैं कि क्या सही है और क्या गलत। लेकिन, आंख के अंधे को तो रास्ता दिखाया जा सकता है, लेकिन अक्ल के अंधे को कोई रास्ता नहीं दिखा सकता है। भगवान इनकी खैर करे।