जबलपुर पत्रिका में 12 घंटे काम कर रहे कर्मचारी, फिर भी नौकरी से निकालने की धमकी

जयपुर। मजीठिया मामले में सुप्रीम कोर्ट गए कर्मचारियों को तो अखबार मालिकान तबादला, निलम्बन और बर्खास्त कर परेशान कर ही रहे हैं, जिससे वे परेशान होकर केस वापस ले लें। राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान, अमर उजाला समेत कई अखबार मालिकानों ने मजीठिया कर्मचारियों को परेशान किया और कर रहे हैं। उस समय जो कर्मचारी केस में नहीं गए थे, वे दूसरे कर्मचारियों की दुर्दशा देखकर केस नहीं करने के फैसले को उचित समझ रहे थे। इस दौरान मजीठिया कर्मचारियों को किसी ना किसी प्रकार से अखबार मालिकानों ने बाहर कर दिया। ऐसे में कार्य का बोझ, बचे हुए कर्मचारियों पर आ गया। प्रबंधन ने भी उनको मजबूर मान उन पर कार्य का बोझ और लाद दिया। वे जितना कार्य पहले करते थे, उसे तिगुना कार्य अब उनको करना पड़ रहा है और वेतन भी उतना ही है, जितना पहले मिलता था। यानी वेतन में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की गई। जो कर्मचारी पहले आठ घंटे की ड्यूटी में तीन-चार घंटे ही काम करता था, अब वही कर्मचारी 12 घंटे लगातार कार्य कर रहा है।

पत्रिका में हालात बदतर

कुछ ऐसे ही हालात हैं, इस समय राजस्थान पत्रिका अखबार में। प्रबंधन ने केस नहीं करने वाले कर्मचारियों पर इतना कार्य लाद दिया है कि वह 12 घंटे से पहले हो ही नहीं सकता है। मजबूर कर्मचारी कोल्हू के बैल की तरह पिल रहे हैं, लेकिन, नौकरी जाने के भय से अत्याचार के खिलाफ आवाज बुलंद नहीं कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि कर्मचारियों पर बोझ डालने के पीछे पत्रिका प्रबंधन यह चाहता है कि कर्मचारी खुद ही इस्तीफा दे दे और फिर उसको नई कम्पनी में ज्वॉइनिंग दे दी जाए। इसलिए अधिकारी भी प्रबंधन की इस चाल के तहत की कर्मचारियों से व्यवहार कर रहे हैं।

...तो फिर हम भी करेंगे दो-दो हाथ

पत्रिका जबलपुर में कर्मचारी 12-12 घंटे कार्य कर रहे हैं। इतना समय देने के बाद भी स्थानीय सम्पादक को कर्मचारियों का कार्य ही पसंद नहीं आ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि सम्पादक कहते हैं कि या तो मेरे मनमुताबिक कार्य करो, नहीं तो कहीं दूसरी जगह नौकरी ढूंढ़ लो। जबलपुर से किसी भी कर्मचारी ने केस नहीं किया है। ऐसे में कार्य का बोझ भी इस सेंटर पर ज्यादा बढ़ाया गया है। कर्मचारियों पर इतना बोझ लाद दिया गया है कि 12 घंटे में भी कार्य पूरा नहीं हो पा रहा है। ऐसे में सम्पादक कर्मचारियों को नौकरी जाने का भय दिखाकर डरा रहा है। इसके पीछे चाल यह है कि यहां के सभी कर्मचारियों से इस्तीफे लेकर उन्हें नई कम्पनी में ज्वॉइनिंग दे दी जाए। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी कर्मचारियों को कुछ भी देना नहीं पड़ेगा। लेकिन, जबलपुर के कर्मचारियों का कहना है कि यदि प्रबंधन ने हालात नहीं सुधारे तो हम भी केस में चले जाएंगे और फिर खुलकर दो-दो हाथ करेंगे।