मजीठिया मामले में इंदौर डीएलसी ने दैनिक भास्कर, पत्रिका और नई दुनिया को किया नोटिस जारी, 1 अक्टूबर को समझौता वार्ता

इंदौर। मजीठिया मामले में सुप्रीम कोर्ट में मप्र की सुनवाई की तारीख जैसे जैसे नजदीक आ रही है वैसे वैसे श्रम अधिकारी भी सक्रिय होते जा रहे हैं। पिछले दिनों पत्रिका अखबार के खिलाफ जारी हुई साढ़े 21 लाख की आरआरसी के बाद अब ट्रांसफर के मामलों में भी अखबार प्रबंधन मुँह की खाने वाले हैं।
इंदौर श्रमायुक्त कार्यालय में मजीठिया क्लेम की सुनवाई के दौरान उप श्रमायुक्त एलपी पाठक ने पत्रिका के प्रबंधक विजय जैन को बाहर भेज दिया।

पत्रिका प्रबंधक विजय जैन को भेजा केबिन से बाहर

दरअसल, हुआ यूँ कि बुधवार को उप श्रमायुक्त श्री पाठक के समक्ष पत्रिका इंदौर के उप संपादक पवन यादव व कैलाश नेकाडी के मामलों की सुनवाई थी। पहले ही 21.46 लाख की rrc जारी होने से बौखलाए पत्रिका प्रबंधन ने 23 सितंबर को पवन यादव का स्थानांतरण अलवर करते हुए तुरंत प्रभाव से उन्हें रिलीव भी कर दिया। इसी तरह 25 सितंबर को कैलाश नेकाडी का स्थानांतरण भी जयपुर कर दिया ताकि ये दोनों 28 सितंबर को होने वाली इस सुनवाई में शामिल ना हो सकेें। इस मामले पर चर्चा करने के लिए मध्यप्रदेश पत्रकार गैर पत्रकार संगठन के पदाधिकारी उप-श्रमायुक्त एलपी पाठक के पास पहुंचे। पाठक के कक्ष में उस समय दबंग दुनिया के दो कर्मचारी व पत्रिका के वरिष्ठ प्रबंधक विजय जैन मौजूद थे। सबसे पहले पाठक ने दबंग दुनिया के दोनों कर्मचारियों को बाहर अपनी बारी का इंतजार करने को कहा इसके बाद जैन को भी बाहर जाने को कहा। जैन आश्चर्यचकित रह गए कि पाठक ने उन्हें बाहर जाने को कहा है। इसके चलते उन्होंने दोबारा पूछा क्या मैं ? तो पाठक बोले जी हां आप। इसके बाद जैन बाहर चले गए।

उप श्रमायुक्त ने भी माना, पत्रिका ने गलत तथ्य दिए

फिर पाठक ने यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष सुचेन्द्र मिश्रा, उपाध्यक्ष योगेंद्र सिंह जादौन और इंदौर जिला अध्यक्ष विजयसिंह ठाकुर के साथ पत्रिका के मामले में चर्चा की। पाठक ने इस बात से सहमति जताई कि पत्रिका ने बहुत से जवाब मनमाने ढंग से दिए हैं। पत्रिका के गलतबयानी को लेकर यूनियन के पदाधिकारियों ने कुछ प्रमाण भी प्रस्तुत किए और इनके आधार पर पाठक से पत्रिका प्रबंधन के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज करवाने की मांग की। एक दिन पहले ही 27 सितंबर को हुई सुनवाई में भी पत्रिका प्रबंधन ने स्वयं को मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशों के अंतर्गत सातवें दर्जे की कंपनी बताया है। यानी इसके मुताबिक पत्रिका प्रबंधन का वार्षिक टर्नओवर 1 से 5 करोड़ रुपए के बीच ही है। पाठक ने भी इसपर अचरज जताया।

तबादला मामलों पर भी पत्रिका को झटका

इसके बाद जब उन्हें पवन यादव और कैलाश नेकाड़ी का स्थानांतरण आदेश दिखाया तो उन्होंने तुरंत सहायक श्रमायुक्त जे.एस उद्दे को फोन कर इस मामले को तुरंत रेफर करने को कहा। जब यूनियन के पदाधिकारियों ने पाठक को बताया कि 26, 28 व 29 मई को की गई यूनियन की शिकायत पर भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है तो उन्होंने उद्दे को माननीय सर्वोच्च न्यायालय में 4 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई का हवाला देते हुए सारे मामलों काे तुरंत रेफर करने को कहा। इसके बाद उद्दे ने यूनियन के पदाधिकारियों और सदस्यों के ट्रांसफर के सभी मामलों में दैनिक भास्कर, पत्रिका और नईदुनिया को नोटिस जारी कर समझौता वार्ता के लिए 1 अक्टूबर की तारीख नियत कर दी। सुचेंद्र मिश्रा ने एफएफपीएल के मेमोरेंडम और आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन के दस्तावेज भी पाठक को दिखाए जिसमें पत्रिका के महाप्रबंधक रघुनाथ सिंह शेयर होल्डर है। पाठक से कहा कि यह कंपनी केवल मजीठिया वेजबोर्ड से बचने के लिए बनाया गया पत्रिका का छद्म आवरण है जो कि जालसाजी की श्रेणी में आता है।

30 सितम्बर तक की मोहलत

इसके बाद पाठक ने विजय जैन को अंदर बुलाया। जैन ने 3 न्यायालयीन निर्णयों के सिवाय कोई भी दस्तावेज पेश नहीं किए। इस पर श्री पाठक ने कहा कि उन्होने जो पंजीयन प्रमाण पत्र पेश करने के लिए कहा है वे पेश करें तो जैन ने 30 सितम्बर तक की मोहलत मांगी। पाठक ने उनसे कह दिया कि ये दस्तावेज पेश करने का अंतिम अवसर है।