हिसार भास्कर प्रबंधन ने मजीठिया साथी के साथ किया ऐसा

हिसार। मजीठिया मामले की सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई और हर तारीख पर मीडिया मालिकों को दो टूक कहने वाले वाले माननीय जज साहब की तल्खी के बाद भी दैनिक भास्कर की अकड़ ढीली नहीं हो रही है। इन्हें पता है कि सुप्रीम कोर्ट में हमारा हारना तय है। लेकिन, कर्मचारियों की तंग आर्थिक स्थिति का फायदा उठाकर वह उन्हें तबादला, सस्पेंशन और बर्खास्त करने से बाज नहीं आ रहा। उसकी सोच यह है कि कर्मचारी आर्थिक स्थिति से तंग आकर केस वापस ले लें और मजीठिया देने से वे बच जाएं। दैनिक भास्कर प्रबंधन की ऐसी ही कारस्तानी का शिकार हुआ है, दैनिक भास्कर हिसार का कर्मचारी मुन्ना प्रसाद।

... और कर दिया बर्खास्त

दैनिक भास्कर के हिसार संस्करण में २६ साल से बतौर सीटीपी ऑपरेटर पद पर तैनात मुन्ना प्रसाद ने मीडिया होल्स को बताया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए प्रबंधन से मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार सैलेरी और एरियर की मांग की। इस पर प्रबंधन के गुर्गों को पहले तो उन्हें समझाया और फिर नौकरी जाने का भय दिखाया। गुर्गों का कोई भी दांव जब इन पर नहीं चला तो झूठे आरोप लगाकर 01/06/2015 को सस्पेंड कर दिया और अपनी एक तरफा जांच कर 13/08/2016 को इनको नौकरी से बर्खास्त कर दिया। इस पर इन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए श्रम आयुक्त के यहां इस बारे में पत्र लिखा। उसके बाद श्रम आयुक्त इसमें कुछ खास नहीं कर रहे हैं और मामला खिंच रहा है।

सभी मीडिया मालिकों की यह है चाल

सुप्रीम कोर्ट में अवमानना की कार्रवाई का सामना कर रहे सभी मीडिया मालिक यह चाहते हैं कि कर्मचारी कोर्ट नहीं जाएं। क्योंकि, जो कर्मचारी कोर्ट चला गया, उसे तो पैसा देना ही पड़ेगा। इसलिए पहले वह कर्मचारियों को मना रहे हैं। जो नहीं मान रहा है, उनको प्रताडि़त कर रहे हैं। उनकी मंशा यह है कि जो कर्मचारी कोर्ट नहीं गए हैं, वे अभी भी नहीं जाएं। क्योंकि, सुप्रीम कोर्ट साफ कह चुका है कि जो शिकायत करेगा, मजीठिया वही पाएगा।

घबराए नहीं, देर सही...न्याय मिलेगा

मुन्ना जी आप सब्र रखें। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। अब तक की कार्रवाई अपने पक्ष में रही है और फैसला भी अपने पक्ष में ही आएगा। प्रबंधन इस तरह की कार्रवाई कर कर्मचारियों को डराना चाह रहा है, जिससे उन्हें वेज बोर्ड नहीं देेना पड़े। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दैनिक भास्कर प्रबंधन को आपको घर बैठे का भी पूरा पैसा देना पड़ेगा और आपको नौकरी पर भी रखना पड़ेगा।