भगवान के घर देर नहीं है अंधेर...आई अब मीडिया हाउसों की बारी

जयपुर। देशभर में फिलहाल नोटबंदी की गर्माहट है। भले ही मीडिया हाउस इस पर खूब खबरें चला रहे हों, लेकिन, वे भी नोटबंदी की चपेट में हैं। उनके पास भी खूब मात्रा में काला धन रखा हुआ है। वे भी मीडिया पावर का इस्तेमाल कर अपने कालेधन को व्हाइट करने की जुगत में लगे हुए हैं, लेकिन, वे फिलहाल सफल नहीं होते दिख रहे हैं। अब माननीय प्रधानमंत्री ने प्रॉपर्टी पर भी सर्जिकल स्टाइक की कहकर भू-माफियाओं के नीचे की जमीन खिसका दी। कई मीडिया हाउस भी भू-माफियाओं से कम नहीं है। वे भी इस खबर से जबरदस्त सदमे में हैं। इन्हीं मीडिया हाउस कम भू-माफियाओं में राजस्थान पत्रिका का भी नाम आता है।

चमचों के नाम से बेनामी सम्पत्तियां

सूत्रों का कहना है कि राजस्थान पत्रिका ने मीडिया हाउस की पावर का इस्तेमाल कर कई राज्यों में सरकारों से जमीन ले रखी हैं। इसके अलावा अपने खास यानी चमर्च टाइप कर्मचारियों के नाम पर कई जगह बेनामी सम्पत्तियों की खरीद कर रखी है। इनमें से कई जमीनें हाईवे के नजदीक भी हैं, जो बेशकीमती है। अब मोदी सरकार के निर्णय से अन्य मीडिया हाउसों की तरह इनकी भी जमीन खिसकी हुई है।

कहीं राज्य सरकार ना लगा दे ताला

राजस्थान पत्रिका प्रबंधन की हालत इस निर्णय से ज्यादा खराब है, क्योंकि राज्य की भाजपा सरकार से भी उसकी ठनी हुई है और उन्हें डर है कि कहीं इस नियम की आड़ में राज्य सरकार उसकी बेनामी सम्पत्तियों पर ताला ना लगा दें। अभी राज्य सरकार की ओर से सुखम गार्डन पर भी तलवार लटकी हुई है।

घबरा रहा है दिल

सूत्रों का कहना है कि पहले नोटबंदी और अब प्रॉपर्टी पर सर्जिकल स्टाइक से राजस्थान पत्रिका प्रबंधन गहरे सदमे में हैं। इतने सालों तक जो सम्पत्ति उन्होंने कर्मचारियों का हक मारकर जोड़ी थी, उसे मोदी सरकार एक कहीं झटके में ना ले ले, इसलिए यह सोच-सोचकर इनका दिल घबरा रहा है।

मुख्यमंत्री नहीं दे रही लिफ्ट

सूत्रों का कहना है कि राजस्थान पत्रिका प्रबंधन राज्य सरकार से सुलह की कोशिशों में लग गया है, जिससे वह अपनी सम्पत्तियों को बचा सके। लेकिन, राज्य की मुख्यमंत्री ने अभी तक उनको लिफ्ट नहीं दी है।

मार रखा है कर्मचारियों का हक

राजस्थान पत्रिका प्रबंधन अपने हजारों कर्मचारियों का हक मारे बैठा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद वह अपने कर्मचारियों को मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ नहीं दे रहा है। इसे लेकर कर्मचारियों ने पत्रिका प्रबंधन पर सुप्रीम कोर्ट में अवमानना का केस कर रखा है। करीब सात अवमानना के मामले सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान पत्रिका प्रबंधन पर चल रहे हैं। किसी ने कहा भी है कि भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं। कर्मचारियों का हक मारने वाले इन मीडिया हाउस कम चोरों की बारी भी भगवान ने ले ली है।