कर्मचारियों के इस्तीफे स्वीकार नहीं कर रहा दैनिक भास्कर

जयपुर। भले ही पत्रिका प्रबंधन कॉस्ट कटिंग के नाम पर कर्मचारी कम कर रहा हो, लेकिन उसका प्रतिस्पर्धी दैनिक भास्कर की राय इससे जुदा है। मजीठिया केस के बाद से ही देशभर के समाचार-पत्र अच्छे और योग्य कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं। क्योंकि, मजीठिया केस में ज्यादातर योग्य और कार्य में दक्ष कर्मचारी ही हैं। इसके बाद भी पत्रिका प्रबंधन कर्मचारी कम करने पर आमादा है। इसका सीधा सा अर्थ है कि वह समाचार-पत्र चलाने का इच्छुक नहीं है। वहीं दैनिक भास्कर प्रबंधन अपने बचे हुए कर्मचारियों को येन-केन प्रकारेण रोके हुए है। इसका सीधा सा अर्थ है कि वह समाचार-पत्र को चलाना चाहता है।

सैलेरी बढ़ाने का दिया जा रहा प्रलोभन

सूत्रों का कहना है कि दैनिक भास्कर प्रबंधन कर्मचारियों के इस्तीफे स्वीकार नहीं कर रहा है। इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों को सैलेरी बढ़ाने का प्रलोभन देकर रोका जा रहा है। उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि अभी तीन-चार सम्पादकीय विभाग के साथियों और करीब पांच-सात अन्य विभागों के साथियों ने अपने-अपने इन्चार्ज को इस्तीफा थमा दिया। इस पर उनके इन्चार्जों ने कहा कि हम तुम्हें कहीं नहीं जाने देंगे। आपकी सैलेरी बढ़ा दी जाएगी। आप यहीं कार्य करो। अभी इस्तीफा मत दो।

साथी हो गए आश्चर्यचकित

इन्चार्ज की यह बात सुनकर वे साथी भी आश्चर्यचकित रह गए। इससे साफ है कि मजीठिया केस के बाद सभी समाचार-पत्र प्रबंधन योग्य कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं। अभी तो हालत यह है कि कर्मचारी इतने ही बचे हैं कि जैसे-तैसे कार्य चल रहा है। यदि इनमें से भी कुछ छोड़ गए तो कई अखबार बंद हो जाएंगे। वहीं राजस्थान पत्रिका खुद ही अखबार बन्द कर रहा है।