पत्रिका ग्रुप के कथित सम्पादक की चटोरी आदत से त्रस्त साथी

जयपुर। राजस्थान पत्रिका ग्रुप के ही एक दैनिक अखबार के कथित सम्पादक अपनी कुर्सी का रौब झाड़कर साथियों की जेब पर डाका डाल रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इस दैनिक अखबार का कार्यालय पहले राजापार्क में था, तब ये सम्पादक रोजाना बारी-बारी से कभी किसी रिपोर्टर को तो कभी किसी डेस्ककर्मी को घुमाने के बहाने राजापार्क के बाजार ले जाते। वहां गोलगप्पे वाला दिखता या फिर अंडे वाला या फिर अन्य चाट का ठेला। वहां वह रुकता और सम्बंधित साथी से कहता कि फलां चीज खिलाओ। बेचारे नौकरी के मारे साथी उसकी ये इच्छा पूरी करते थे और उस खाने का बिल अपनी जेब से देते थे। उसके मुंह पर तो कोई भी साथी कुछ नहीं कहता, लेकिन, पीठ पीछे उस कथित सम्पादक का मजाक सब उड़ाते। हालात ये हो गए कि जब इन कथित सम्पादक के साथ कोई साथी बाहर जाने को दिखता तो पूरे ऑफिस वाले कहते कि आज फलां साथी हलाल होगा। खैर मजबूरी के चलते साथी कर्मचारी कथित चटोरे सम्पादक को चटाते रहे।

दफ्तर की जगह बदली, आदत नहीं

कुछ दिनों बाद इस अखबार का दफ्तर झालाना डूंगरी में ही शिफ्ट हो गया। तब उन साथियों ने सोचा कि अब इन कथित चटोरे सम्पादक से चैन मिलेगा। लेकिन, कथित चटोरे सम्पादक ने ऐसा सोचने वाले साथियों के सपनों पर गहरा कुठाराघात कर दिया। वे फिर से रोजाना बारी-बारी से साथियों को कभी झालाना डूंगरी स्थित अंडे वालों के ठेलों के पास तो कभी बजाज नगर स्थित चाट-पकौडिय़ों वालों के पास ले जाने लगे और अपनी मुफ्त में चाटने की फितरत की पूर्ति करने लग गए।


साथियों का टूटने लगा सब्र का बांध

अब इन साथियों के सब्र का बांध टूटने लग गया है। इनका कहना है कि इन कथित चटोरे सम्पादक की सैलेरी तो हमसे कई गुना ज्यादा है और काम कुछ करते नहीं है। कभी किसी अधिकारी के तो कभी किसी अधिकारी के केबिन में जाकर धोक लगाने का कार्य करते हैं। ऑफिस आकर कुछ देर कम्प्यूटर के आगे ऐसे बैठ जाते हैं, जैसे कितने ज्ञानी हों। लेकिन, खबरों की समझ ही नहीं है। इनकी आदत से त्रस्त साथियों का कहना है कि पहले इनकी खबरों की समझ को हम जैसे-तैसे झेल रहे थे। अब इनकी चटोरेपन की आदत को कब तक झेलें। हम अपनी सैलेरी में बड़ी मुश्किल से परिवार का गुजारा कर रहे हैं, इन कथित चटोरे सम्पादक को चटाने के लिए कहां से लाएं। इन साथियों का कहना है कि कैसे भी करके इन चटोरे सम्पादक से हमें छुटकारा मिल जाए...बस, हम कुछ और नहीं चाहते। ये त्रस्त साथी इन कथित चटोरे सम्पादक की शिकायत राजस्थान पत्रिका के मालिक नीहार कोठारी और सिद्धार्थ कोठारी तक पहुंचाने में लगे हुए हैं। अब देखने वाली बात यह है कि इन साथियों को इन कथित चटोरे सम्पादक से कब मुक्ति मिलती है।