डेलीन्यूज का कांग्रेसीकरण, कथित सम्पादक देख रहे सीएम प्रेस सलाहकार और सूचना आयुक्त बनने का सपना

जयपुर। राजस्थान पत्रिका में कार्य करने वाले और उसे नजदीक से जानने वाले यह बात अच्छे से जानते हैं कि माननीय उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत के निधन के दिन ही राजस्थान पत्रिका का कलेवर बदला था। यानी उस दिन राजस्थान पत्रिका को नया ले-आउट दिया गया था। हालांकि, अभी कुछ दिनों पहले उसे भी बदल दिया गया है। यह बात बताने का तात्पर्य यह है कि उस दिन पत्रिका ने जो अपना चोला बदला, वह अनवरत जारी है। यह चोला बदलने का क्रम सिर्फ कलेवर तक ही सीमित नहीं है बल्कि किसकी तारीफ करनी है और किसके विपक्ष में खबर चलानी है, समय के साथ यह भी बदलता रहा है। अभी की बात करें तो पत्रिका प्रबंधन ने अपने दूसरे समाचार-पत्र डेली न्यूज का फिलहाल कांग्रेसीकरण कर रखा है। सूत्रों का कहना है कि सभी रिपोर्टर और डेस्क साथियों को यह आदेश दिया हुआ है कि कांग्रेस की कोई भी खबर छूटने नहीं पाए। डेलीन्यूज में कांग्रेस की हर खबर को प्रमुखता से प्रकाशित करना है।

रिपोर्टर और डेस्ककर्मी दुखी

सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट और कांग्रेस प्रवक्ता और उपाध्यक्ष अर्चना शर्मा की कोई भी खबर हो, उसे तुरन्त लगाने को कह रखा है। रिपोर्टर और डेस्ककर्मी भी इस तरह की खबरों पर बड़ा चौकस रहते हैं। इन दोनों की कोई भी खबर हो, रिपोर्टर सारी महत्वपूर्ण खबरों को छोड़कर पहले अच्छे से इनकी खबरें बनाता है। साथ ही डेस्ककर्मी भी इन्हीं की खबरों को अच्छे से प्लेसमेंट देने में लगे रहते हैं। सूत्रों ने बताया कि सभी साथी इससे दुखी है, लेकिन नौकरी जाने के भय से मन-मारकर ऐसा कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है सरकार विरोधी हर खबर में इनका वर्जन लेने के आदेश दे रखे हैं। प्रबंधन के इस फैसले से वे रिपोर्टर खासे परेशान हैं, जो भगवा खेमे के हैं, उनकी खबरों को तवज्जों नहीं दी जा रही है। इसलिए सरकार में उनकी दाल भी नहीं गल रही है।

इसलिए कर रहे ऐसा

सूत्रों ने बताया कि फिलहाल पत्रिका प्रबंधन की राज्य की भाजपा सरकार से ठनी हुई है। साथ ही दो-ढाई साल चुनाव होने में हैं। ऐसे में पत्रिका प्रबंधन कांग्रेस को भी अपने पक्ष में करने में लगा हुआ है। पत्रिका प्रबंधन की सोच यह है कि चुनाव बाद यदि कांग्रेस की सरकार आएगी, तो हमें फायदा पहुंचाएगी। यदि वापस से भाजपा की सरकार बनती है, तो पत्रिका में मुख्यमंत्री को छोड़कर भाजपा के अन्य नेताओं की खबरें तो प्रकाशित कर ही रहे हैं। इसलिए पत्रिका प्रबंधन खुलकर भाजपा की मुखालफत नहीं कर रही है। इसलिए वह मुख्य अखबार पत्रिका में दोनों पार्टियों को समान रूप से प्रकाशित कर रही है। जिससे कोई भी नाराज ना हो, वहीं डेलीन्यूज में ज्यादातर कवरेज कांग्रेेस को दी जा रही है।

कथित सम्पादक देख रहे सीएम प्रेस सलाहकार और सूचना आयुक्त बनने का सपना

सूत्रों का कहना है कि कैंटीन में चाय बोलकर और अधिकारियों के केबिनों में चाय पी-पीकर कथित सम्पादक बने कुछ लोग यह भी खयाली पुलाव बना रहे हैं कि यदि राज्य में अगली सरकार कांग्रेस की आ गई तो वे भी मुख्यमंत्री के प्रेस सलाहकार या फिर सूचना आयुक्त जैसे अहम पद प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए ऐसे सम्पादक भी आजकल कांग्रेस की खबरों के साथ ही सचिन पायलट की खबरों को विशेष स्थान दे रहे हैं। क्योंकि, अभी यह माना जा रहा है कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी तो मुख्यमंत्री बनने के ज्यादा चंास सचिन पायलट के ही हैं, ऐसे में पायलट साहब उनको अहम पद देकर तोहफा दे सकते हैं। जो यह सम्पादक सपना देख रहे हैं, वो कांग्रेस की एक महिला नेत्री और उनके पति के शुरू से ही भरोसेमंद रहे हैं और इन्होंने ही डेलीन्यूज को कांग्रेसीकरण करने का पूरा मसौदा मंजूर करवाया है।

मीडिया के दोगलेपन को समझते हैं राजनेता

राजनेता भी धीरे-धीरे मीडिया के चाल, चरित्र और चेहरे को समझ गए हैं, उन्हें पता है कि जब सरकार मीडिया को भाव नहीं देती, तब वह विपक्ष के नेताओं की खबरों को प्रमुख स्थान देते हैं। यदि सरकार के साथ मीडिया के सम्बंध अच्छे चल रहे होते हैं, वहां पर विपक्ष के नेताओं की खबरों को प्रमुख स्थान नहीं दिया जाता है। फिर उनकी महत्वपूर्ण खबर भी ऐसी जगह लगाई जाती है, जो ढूंढऩे से भी दिखती नहीं है। उन्हें पता है कि जब हमारी सरकार होगी और हम मीडिया को खाने को नहीं देंगे, तो हमारे खिलाफ भी निगेटिव खबरें चलाई जाएंगी। इसलिए वे भी अपने समय के हिसाब से मीडिया को तवज्जो देते हैं।