मजीठिया साथी जितेन्द्र ने हाईकोर्ट में लगाई केविएट, पत्रिका को नहीं मिलेगा स्टे

भोपाल। सुप्रीम कोर्ट में निडर होकर मीडिया मालिकों से दो-दो हाथ कर रहे सभी साथियों को साधुवाद। आपकी मेहनत रंग लाने लग गई है। ग्वालियर श्रम आयुक्त की और से पत्रिका पर 22 लाख रूपए की रिकवरी का आदेश निकलने के बाद हमारे साथी जितेन्द्र जाट ने जोश में होश नहीं खोए। उन्होंने तुरन्त ही इंदौर और ग्वालियर हाईकोर्ट में केविएट लगा दी।
केविएट का मतलब होता है कि यदि पत्रिका अब श्रम आयुक्त के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट से स्टे लेने की कोशिश करेगी तो हाईकोर्ट पहले हमारे साथी जितेन्द्र जाट का पक्ष सुनेगी। उसके बाद ही स्टे देने पर फैसला होगा। हाईकोर्ट बिना जितेन्द्र जाट का पक्ष सुने स्टे नहीं दे सकता है। यानी पत्रिका को हाईकोर्ट से अब स्टे भी नहीं मिलेगा और उसके पास अब एरियर की करीब 22 लाख रूपए की राशि देने के अलावा कोई विकल्प है नहीं। क्योंकि, सुप्रीम कोर्ट में तो पहले से ही मजीठिया मामला चल रहा है।
यदि इस मामले को पत्रिका अलग से सुप्रीम कोर्ट ले जाने की सोचती भी है तो सुप्रीम कोर्ट यह कहेगा कि पहले हाईकोर्ट जाओ। मतलब साफ है कि पत्रिका को कहीं से भी इस मामले पर राहत नहीं मिलेगी। उसे हर सूरत में हमारे साथी जितेन्द्र जाट को एरियर की यह राशि देनी ही पड़ेगी। जय हो मजीठिया की।