जागरण, भास्कर और पत्रिका प्रबंधन मजीठिया साथियों को मनाने में जुटा

- समझौता करने के लिए साथियों को कर रहे फोन

जयपुर। सुप्रीम कोर्ट के 25 अक्टूबर के रुख के बाद देशभर के मीडिया मालिकों की नींद हराम हो गई है। माननीय सुप्रीम कोर्ट की ओर से मीडिया मालिकों के सरताज बने बैठे दैनिक जागरण के मालिकों को तलब कर लेने से सभी के हाथ-पैर फूलने लग गए हैं। तमाम मीडिया मालिक अपने वकीलों के पास हाजिरी लगा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि वकीलों ने इन्हें कहा है कि हमने आपको पहले ही सावचेत कर दिया था। दैनिक जागरण के मालिकों को अंदेशा है कि कहीं 25 अक्टूबर को माननीय सुप्रीम कोर्ट उन्हें सीधे जेल ना भेज दे, इसलिए वे अपने वकीलों से हर पहलू पर चर्चा कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि जागरण मालिक अपनी जमानत पर भी वकीलों से चर्चा कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि वकीलों ने सभी मीडिया मालिको से साफ कह दिया है कि जो करना है जल्दी करो। केस करने वाले कर्मचारियों को उनका हक दे दो, वरना 25 अक्टूबर को सभी पर अवमानना का केस लग सकता है। उसके बाद हम भी कुछ नहीं कर पाएंगे। सूत्रों का कहना है कि डरे-सहमे मीडिया मालिकों को भी यह बात समझ में आ गई है। अब उन्होंने भी केस करने वाले साथियों को उनका हक देने की सोच ली है, जिससे 25 अक्टूबर को अवमानना की कार्यवाही से बचा जा सके।

जागरण प्रबंधन में हड़कम्प

सूत्रों से खबर है कि मालिकों को कोर्ट में तलब करने की खबर से जागरण प्रबंधन में हड़कम्प मचा हुआ है। उन चमचों में अब ज्यादा खौफ है, जिन्होंने प्रबंधन को सुप्रीम कोर्ट में जाने की सलाह दी थी। अब इन चमचे टाइप अधिकारियों को स्वयं की नौकरी खतरे में दिख रही है। इसलिए प्रबंधन के कहने पर इन्होंने केस करने वाले साथियों से बातचीत शुरू कर दी है। उनको मनाने की कवायद शुरू हो गई है। सूत्रों का कहना है कि 5 अक्टूबर को दैनिक जागरण प्रबंधन ने केस करने वाले कई साथियों को समझौता करने के लिए बुलाया है। उनके साथ प्रबंधन क्या बात कर रहा है, केस वापस लेने के लिए क्या समझौता प्लान दिया है। यह सब मीडिया होल्स आपको जल्द ही बताएगा।

दैनिक भास्कर और पत्रिका प्रबंधन भी कर रहे फोन

सूत्रों से खबर है कि 25 अक्टूबर को राजस्थान की सुनवाई होनी है। दैनिक जागरण के खिलाफ रुख को देखकर राजस्थान में दैनिक भास्कर और राजस्थान पत्रिका के मालिक भी खौफजदा हैं। उन्हें डर है कि कहीं 25 अक्टूबर की सुनवाई में उन्हें भी कोर्ट तलब ना कर ले। इसलिए वे अभी से डैमेज कंट्रोल में लग गए हैं। पत्रिका, भास्कर प्रबंधन की ओर से भी मजीठिया साथियों को फोन जा रहे हैं और उन्हें वार्ता के लिए बुलाया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि अभी उन साथियों को फोन करके बुलाया जा रहा है, जिन्होंने केस तो किया है, लेकिन वे अभी भी संस्थान में नौकरी भी कर रहे हैं। क्योंकि, प्रबंधन को लगता है कि ऐसे साथी उनकी बात को आसानी से मान लेंगे। इसके बाद उम्मीद की जा रही है कि बाकी साथियों से भी बात की जाएगी। ये दोनों प्रबंधन 25 अक्टूबर से पहलेे ज्यादातर मजीठिया साथियों से समझौता करने की प्लानिंग पर कार्य कर रहे हैं, जिससे सुनवाई के दिन ये माननीय सुप्रीम कोर्ट को अवगत करा सकें कि हम कर्मचारियों को लाभ दे रहे हैं। इन्हें लगता है कि ऐसा करके शायद से सुप्रीम कोर्ट के कोपभाजन से बच जाएं।

मीडिया होल्स की यह सलाह

मीडिया होल्स के पास दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका से ऐसे कई साथियों के फोन आए। उन्होंने बताया कि प्रबंधन की ओर से उन्हें बात करने बुलाया गया है। उन्होंने मीडिया होल्स से सलाह मांगी कि उन्हें क्या करना चाहिए। इस पर मीडिया होल्स ने जो सलाह दी, वह सभी साथियों के साथ शेयर की जा रही है, जिससे वे जल्दबाजी में अपना कोई अहित ना कर बैठें। मीडिया होल्स ने सलाह दी है कि प्रबंधन से बात करने में कोई बुराई नहीं है। उनके समझौता प्लान को सुनें और उनकी सारी शर्तों को भी जानें। लेकिन, अपनी भावनाओं का इजहार ना करें और जल्दबाजी में किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं करें। प्रबंधन से बात करने के बाद उनसे कहें कि हम अपने वकील और वरिष्ठ साथियों से सलाह लेकर अपना आगे कोई कदम उठाएंगे। उसके बाद आगे क्या कदम उठाना है, यह मीडिया होल्स आपको जल्द बताएगा।