आखिर ऐसा क्या हुआ...चपरासी से खा गए पत्रिका के सर्कुलेशन हैड मात

कोयम्बटूर। राजस्थान पत्रिका का सर्कुलेशन लगातार गिर रहा है। राजस्थान पत्रिका के विभिन्न राज्य स्थित कार्यालयों से हर माह समीक्षा रिपोर्ट में आने वाले आंकड़े भी इस बात की गवाही देते हैं। ताजा खबर राजस्थान पत्रिका के कोयम्बटूर सेंटर से है। यहां पर राजस्थान पत्रिका ने हिन्दी और राजस्थानी भाषी लोगों के लिए समाचार-पत्र का प्रकाशन शुरू किया था। यहां पर राजस्थान पत्रिका दो-तीन साल में भी सर्कुलेशन को नहीं बढ़ा पाया।

दिनभर में नहीं बिकी एक भी प्रति

अभी कोयम्बटूर के पास कोझिकोड में भाजपा ने बड़ा सम्मेलन आयोजित किया था। इसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी आए थे और इस सम्मेलन में हिन्दी भाषी करीब दो-तीन लाख लोगों ने शिरकत की थी। राजस्थान पत्रिका प्रबंधन ने अपने अखबार की पब्लिसिटी के लिए इसे एक बेहतर अवसर समझा। पत्रिका प्रबंधन ने कोयम्बटूर के सर्कुलेशन हैड को वहां समाचार-पत्र बेचने भेजा। सर्कुलेशन हैड हजारों की तादाद में समाचार-पत्र की प्रतियां लेकर गया और सम्मेलन में बेचने बैठ गया। लेकिन, सर्कुलेशन हैड को दिनभर में दो-तीन लाख लोगों की भीड़ में एक कॉपी का भी खरीदार नहीं मिला। बेचारे सर्कुलेशन हैड अपना सा मुंह लेकर वापस आ गए।

उलटा टीए, डीए का थमा दिया बिल

उन्होंने ऑफिस आकर बता दिया कि राजस्थान पत्रिका को खरीदने में किसी ने भी दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसके बाद उन्होंने अपने टीए, डीए का करीब 1500 रूपए का बिल बनाकर प्रबंधन को थमा दिया। यानी समाचार-पत्र की एक कॉपी तो बेच नहीं पाए और उलटे 1500 रूपए की देनदारी पत्रिका प्रबंधन पर निकाल दी।

चपरासी ने बेची चार प्रति

इसके अगले दिन पत्रिका प्रबंधन ने वहां एक चपरासी को भेजा। चपरासी भी हजारों की तादाद में कॉपी लेकर बेचने चला गया। दिनभर की मशक्कत के बाद चपरासी ने राजस्थान पत्रिका की चार प्रति बेच दी। फिर ऑफिस आकर चपरासी ने भी टीए, डीए के करीब 800 रूपए का बिल बनाकर पत्रिका प्रबंधन को सौंप दिया। इससे साफ है कि पत्रिका में जो हैड बनाकर बैठा रखे हैं, वे नकाराा हैं और जो वास्तविकता में काम के कर्मचारी हैं, उनकी कद्र नहीं है। यदि इस कार्य के हिसाब से आकलन किया जाए तो चपरासी को तो सर्कुलेशन हैड होना चाहिए और सर्कुलेशन हैड को चपरासी। क्योंकि, चपरासी ने सर्कुलेशन हैड को मात दे दी।

पत्रिका को कोई नहीं कर रहा पसंद

हालांकि, दो दिन की मशक्कत के बाद भी राजस्थान पत्रिका कुल पांच लाख लोगों की भीड़ में समाचार पत्र की पांच प्रतियां भी नहीं बेच पाया। इससे साफ जाहिर होता है कि पत्रिका को कोई भी पढ़ना पसंद नहीं कर रहा है।

सर्कुलेशन विभाग छिपा रहा अपनी नाकामी

यही कारण है कि सर्कुलेशन के नेशनल हैड सम्पादकीय विभाग की मीटिंग लेते हैं और उन्हें सर्कुलेशन बढ़ाने को प्रेरित किया जाता है। यानी सर्कुलेशन विभाग की नाकामियों को सम्पादकीय विभाग के साथियों की मेहनत से छुपाना चाहते हैं। राजस्थान पत्रिका की सुर्कलेशन टीम कहीं पर भी समाचार-पत्र की प्रतियां नहीं बढ़वा पा रही है।