...तो तीन माह बाद मीडिया मालिकों पर फिर चलेगा अवमानना केस

लेशिष जैन

जयपुर। मजीठिया वेज बोर्ड पर 19 जून को आए माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मीडियाकर्मियों में हताशा, निराशा और परेशानी है। उन्होंने फैसले के तुरन्त बाद आई तमाम खबरों पर विश्वास कर लिया था। सबसे ज्यादा हैरानी मीडियाकर्मियों को इसलिए हुई कि मीडिया मालिक सुप्रीम कोर्ट की अवमानना से कैसे बच गए। इसी बात से सभी मीडियाकर्मी सबसे ज्यादा परेशान थे। उन्हें लगने लगा कि अब लेबर कोर्ट में 10-20 साल लडऩा पड़ेगा, उसके बाद उन्हें हाईकोर्ट में लडऩा पड़ेगा और तब जाकर कहीं मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ मिलेगा। उनकी तमाम भ्रान्तियों को दूर करते हुए मीडिया होल्स ऐसे मीडियाकर्मियों को बता रहा है कि उनके लिए सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे अभी बंद नहीं हुए हैं और ना ही उनको लेबर कोर्ट में 10-20 साल लम्बी लड़ाई लडऩी पड़ेगी।

ठेका कर्मचारी पर फंस गए मालिक

इस तथ्य को समझने के लिए आप पहले 19 जून को दिए गए माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पढ़ें। उसमें सिर्फ एक बात मीडिया मालिकों के हक में गई है और वो ये है कि वे सीधे तौर पर अवमानना से बच गए हैं। क्योंकि, उन्होंने 20-जे का हवाला दिया था। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने ठेकाकर्मियों को भी वेजबोर्ड देने का आदेश इस फैसले में दे दिया है, जो मीडिया मालिकों के लिए अच्छी खबर नहीं है। क्योंकि, अभी तक वे इन्हें वेजबोर्ड का हकदार मान ही नहीं रहे थे।

मीडियाकर्मियों के लिए खुले हैं सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे

अब बात आती है कि यह केस कितने दिन में निपटेगा। यह तो आपको पता ही होगा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2014 के ऑर्डर में कह रखा है कि मीडियाकर्मियों को एरियर की राशि एक साल के अंदर 4 समान किश्तों में दी जाए। यह राशि अभी तक मीडियाकर्मियों को नहीं मिली है। चूंकि, माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 19 जून को दिए अपने फैसले में कुछ बातें जो पुराने आदेश में क्लीयर नहीं थीं, उनको भी क्लीयर कर दिया है। ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट का 19 जून का आदेश प्रभावी रहेगा। आदेश के एक साल के भीतर ही अवमानना की कार्यवाही हो सकती है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया मालिकों या फिर लेबर कोर्ट को कोई बाउंडेशन ना देते हुए भी अपरोक्ष रूप से एक साल की अवधि नियत कर दी है। यानी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक मीडिया मालिकों को इस ताजा फैसले के तीन माह बाद एरियर की एक किश्त नियमानुसार मीडियाकर्मियों को जारी कर देनी चाहिए। चूंकि, इसकी संभावना बहुत कम है कि मीडिया मालिक ऐसा करेंगे। यदि यह माना जाए कि मीडिया मालिक यह किश्त नहीं देते हैं तो फिर तीन महीने की अवधि पूरी होते ही मीडियाकर्मी फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच जाएंगे कि ये मीडिया मालिक फिर आपके आदेश की पालना नहीं कर रहे हैं। यानी चौथे माह में मीडिया मालिकों को फिर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना केस का सामना करना पड़ सकता है। इस बार तो मीडिया मालिक 20-जे की आड़ में बच गए, लेकिन, इस बार वे 20-जे को भी ढाल नहीं बना सकेंगे। इसलिए संभावना यही है कि मीडिया मालिक केसधारी कर्मचारियों को जल्द से जल्द उनका बकाया चुकाकर इस केस से अपना पीछा छुड़ा लेंगे। इसलिए लेबर कोर्ट में किसी को भी नहीं लडऩा पड़ेगा। हालांकि, जो कर्मचारी केस में नहीं गए हैं, उन्हें वेज बोर्ड का लाभ देने से मीडिया मालिक बच जाएंगे, क्योंकि, वे लोग अब लेबर कोर्ट में शिकायत नहीं करेंगे। साथ ही ठेकाकर्मियों को परेशान और नौकरी से निकालने में भी मालिक डरेंगे, क्योंकि, वह भी अपना हक मांगने लेबर कोर्ट जा सकता है।